सूरवाल बांध डूब क्षेत्र में जमीन खाली कराने को लेकर खेड़ापति हनुमान जी मंदिर में प्रेस वार्ता करते किसान।

सूरवाल बांध के डूब क्षेत्र में आने वाली किसानों की खातेदारी भूमि को समय पर खाली कराने और नहर खोलने की मांग को लेकर आज खेड़ापति हनुमान जी, आ टू न खुर्द में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान स्थानीय किसानों ने अपनी समस्याएं पत्रकारों के सामने रखीं और जिला प्रशासन से समय रहते समाधान करने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन समय पर नहर नहीं खोलता और उनकी खातेदारी भूमि खाली नहीं कराता है, तो वे आगे बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे।

किसानों के अनुसार, सूरवाल बांध के डूब क्षेत्र में उनकी तीन से चार हजार बीघा खातेदारी भूमि पानी में डूब जाती है। इससे किसानों को अपनी जमीन पर खेती करने में परेशानी होती है। किसानों ने कहा कि अभी भी समय है और यदि प्रशासन चाहे तो नहर खोलकर किसानों की जमीन समय पर खाली कराई जा सकती है। इससे किसान नवंबर महीने में आने वाली खरीफ की फसल के लिए अपनी खातेदारी भूमि में मवेशियों के चारे और गेहूं-अनाज की पैदावार कर सकेंगे।

स्थानीय किसानों ने बताया कि उन्होंने बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन सहित अन्य ऋण ले रखे हैं। मार्च-अप्रैल के दौरान बैंक किसानों पर ऋण चुकाने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में किसान जैसे-तैसे अपनी इज्जत बचाते हुए आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश करते हैं। किसानों का कहना है कि जमीन समय पर खाली नहीं होने से खेती और आर्थिक स्थिति से जुड़ी उनकी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

किसानों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार मुख्यमंत्री महोदय के नाम क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र गोठवाल और जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं। इसके अलावा कई बार महापंचायत आयोजित कर ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन आज दिन तक सरकार की तरफ से स्थानीय किसानों को कोई आश्वासन नहीं मिला है।

प्रेस वार्ता के दौरान किसानों ने प्रशासन से मांग की कि समय रहते नहर खोलकर डूब क्षेत्र की खातेदारी भूमि खाली कराई जाए, ताकि किसान अपनी जमीन पर खेती कर सकें और मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था कर सकें। किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।

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