गंगापुर सिटी में मनाया गया मानव एकता दिवस, संत समागम का हुआ आयोजन

बाबा गुरबचन सिंह की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में जितेंद्र रावल ने गुरुसिखी जीवन और रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला।

Update: 2026-04-24 13:37 GMT

गंगापुर सिटी में आयोजित मानव एकता दिवस के अवसर पर संत समागम में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। इस दौरान बाबा गुरबचन सिंह के बलिदान को याद करते हुए समाज सेवा और रक्तदान का संकल्प लिया गया।

गंगापुर सिटी, 24 अप्रैल 2026: करुणा, प्रेम और एकत्व की चेतना से ओतप्रोत वातावरण में गंगापुर सिटी ने मानव एकता दिवस को एक सजीव आध्यात्मिक उत्सव के रूप में अनुभव किया, जहाँ “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का संदेश शब्दों से आगे बढ़कर जनमानस में प्रत्यक्ष रूप से जीवंत हुआ। यह अवसर परोपकार, करुणा और परमार्थ जैसे मानवीय मूल्यों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति बनकर सामने आया।

इसी क्रम में गंगापुर सिटी में मानव एकता दिवस संत समागम बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया। कोटा से पधारे जितेंद्र रावल जी ने अपार श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुसिख के लिए अपने गुरु का वचन सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि गुरसिख अपने गुरु के मार्गदर्शन में चलते हुए अपने भीतर की कुरीतियों को त्यागकर पूर्ण गुरुसिखी वाला जीवन जीता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बाबा गुरबचन सिंह जी द्वारा दी गई शिक्षाओं ने समाज में नई ऊर्जा का संचार किया और लोगों को कुरीतियों से दूर होकर जीवन जीने की प्रेरणा दी। संपूर्ण कार्यक्रम मुखी बहन पुष्पा रानी जी की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

मानव एकता दिवस 24 अप्रैल को बाबा गुरु वचन सिंह जी की दिव्य स्मृति में सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राज पिताजी के सानिध्य में दिल्ली के ग्राउंड नंबर 8 में आयोजित किया गया। इस अवसर पर संत निरंकारी मंडल के सचिव आदरणीय श्री जोगेंद्र सुखीजा ने जानकारी दी कि पूरे भारत वर्ष में लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 40,000 यूनिट रक्त संकलित किया गया। यह पहल निष्काम सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में उभरी।

युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी ने सत्य, सरलता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हुए युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और अपनी ऊर्जा को समाजसेवा में लगाने की प्रेरणा दी। वहीं बाबा हरदेव सिंह जी ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का संदेश देकर सेवा को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया, जिसे सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज निरंतर आगे बढ़ा रही हैं।

यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम भी सिद्ध हुआ।

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सपना लखवानी

मीडिया सहायक, ब्रांच गंगापुर सिटी

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