तस्वीर में एक पंडाल के नीचे पुलिस अधिकारी और नागरिक हाथ आगे बढ़ाकर शपथ लेते हुए।

बाटोदा, नारोली, फुलवाड़ा सहित क्षेत्र की कुछ ग्राम सेवा सहकारी समितियों में खाद वितरण को लेकर किसानों की परेशानी सामने आई है। दूसरे गाँवों से इन समितियों में पंजीकरण कराने वाले किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि पहले संबंधित गाँव के किसानों को खाद वितरित किया जाएगा और खाद बचने की स्थिति में ही दूसरे गाँवों के किसानों को खाद दिया जाएगा।

बरनाला सोसायटी की सदस्य अधिवक्ता मंजू कुमारी मीणा ने खाद वितरण की इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि खाद वितरण में स्थानीय किसानों को प्राथमिकता दी जानी है, तो दूसरे गाँवों के किसानों का पंजीकरण इन समितियों में क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान पंजीकरण कराने के बाद खाद मिलने की उम्मीद में समिति पर पहुँचते हैं, लेकिन वहाँ उन्हें बाहर का किसान बताकर खाद नहीं दिया जाता। इससे किसानों को अनावश्यक रूप से भीड़ में खड़ा रहना पड़ता है और उनका समय व पैसा दोनों बर्बाद होते हैं।

मंजू कुमारी मीणा ने कहा कि यदि प्रत्येक समिति में केवल संबंधित गाँव के किसानों को ही खाद उपलब्ध कराया जाना है, तो दूसरे गाँवों के किसानों का पंजीकरण उनके अपने गाँव की समिति में ही किया जाना चाहिए। इससे किसानों को पहले से पता रहेगा कि उन्हें खाद कहाँ से लेना है और उन्हें अनावश्यक रूप से दूसरी समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की कि बाटोदा, नारोली, फुलवाड़ा और अन्य समितियों में खाद वितरण एवं पंजीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाए। यदि गाँववार प्राथमिकता लागू है तो उसी के अनुसार पंजीकरण की व्यवस्था की जाए, ताकि बाहर से आने वाले किसानों को खाद के लिए अनावश्यक भीड़ और परेशानी का सामना न करना पड़े।

मंजू कुमारी मीणा ने कहा कि खाद जैसी आवश्यक कृषि सामग्री के वितरण में स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि किसी भी किसान को पंजीकरण कराने के बाद खाद के लिए भटकना न पड़े।

Tags: