तस्वीर में आदर्श नगर स्थित तेरापंथ भवन के मंच पर सफेद वस्त्रों में नजर आ रहे वक्ता और साधक ध्यान एवं धार्मिक अनुष्ठान करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

आदर्श नगर, 8 सितंबर। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, आदर्श नगर के तत्वावधान में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अवसर पर तेरापंथ भवन, आदर्श नगर में 8 से 16 सितंबर तक नौ दिवसीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन किए जाएंगे। तेरापंथ धर्मसंघ के परम पूज्य ग्यारहवें आचार्यश्री महाश्रमणजी एवं युवाचार्य महावीर कुमारजी के आध्यात्मिक निर्देशन में होने वाले इन आयोजनों को लेकर सभा के पदाधिकारियों और श्रावक-श्राविकाओं में विशेष उत्साह है।

तेरापंथ सभा के अध्यक्ष अनिल जैन और मंत्री अशोक जैन ने बताया कि 8 सितंबर से 16 सितंबर तक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का आयोजन महासभा के निर्देशानुसार परंपरागत तरीके से किया जाएगा। नौ दिवसीय आयोजन के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग आध्यात्मिक विषयों पर कार्यक्रम होंगे। तेरापंथ धर्मसंघ की उपासक श्रेणी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक, प्रवक्ता उपासक पारसमल दुगड़ एवं सहयोगी उपासक रमेश कुमार जी सिंघवी, मुंबई की सहभागिता रहेगी। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले तथा प्रेक्षा पुरस्कार से सम्मानित उपासक पारसमलजी दुगड़ असाध्य बीमारियों का प्रेक्षा चिकित्सा पद्धति से उपचार देने में सक्षम हैं। वे प्रतिदिन प्रातः जैन-अजैन सभी लोगों को निःशुल्क मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे।

पारसमलजी दुगड़ के मार्गदर्शन में पर्युषण महापर्व के दौरान धर्म, साधना, संयम, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। नौ दिनों में प्रत्येक दिन को विशेष आध्यात्मिक विषय के रूप में मनाया जाएगा।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 8 सितंबर मंगलवार को खाद्य संयम दिवस, 9 सितंबर बुधवार को स्वाध्याय दिवस, 10 सितंबर गुरुवार को सामायिक दिवस और 11 सितंबर शुक्रवार को वाणी संयम दिवस मनाया जाएगा।

इसके बाद 12 सितंबर शनिवार को व्रत चेतना दिवस, 13 सितंबर रविवार को जप दिवस और 14 सितंबर सोमवार को ध्यान दिवस के कार्यक्रम होंगे। 15 सितंबर मंगलवार को भगवती संवत्सरी महापर्व की आराधना तप, त्याग, प्रत्याख्यान एवं आत्मचिंतन के साथ की जाएगी। 16 सितंबर बुधवार को प्रातः ख़मत खामणा दिवस के साथ पर्युषण महापर्व के कार्यक्रमों का समापन होगा।

पर्युषण महापर्व जैन धर्मावलम्बियों के लिए आत्मशुद्धि, संयम, साधना, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु धार्मिक आराधना के साथ जीवन में क्षमा, करुणा, संयम, अहिंसा और आत्मानुशासन जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए संकल्पित होते हैं। साथ ही स्व एवं परकल्याण की भावना से प्रतिदिन प्रतिक्रमण कर मनोमालिन्य से दूर होकर सरल बनने का अभ्यास करते हैं। इस तरह नौ दिवसीय आयोजन धार्मिक आराधना के साथ आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना का अवसर प्रदान करेगा।

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