सलूंबर में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, कचौरी-फास्ट फूड सेंटरों से लिए 8 नमूने

सलूंबर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कचौरी निर्माताओं और फास्ट फूड सेंटरों का निरीक्षण कर आठ खाद्य नमूने लिए। खाद्य तेल, बेसन, कचौरी और अन्य सामग्री की जांच के बाद मानकों के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।

Update: 2026-07-29 15:02 GMT

तस्वीर में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी सलूंबर में एक नाश्ता सेंटर पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेते और दस्तावेज तैयार करते हुए नजर आ रहे हैं।

सलूंबर। राज्य सरकार के शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान के तहत जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण और नमूनीकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में बुधवार को खाद्य सुरक्षा दल ने जिले के विभिन्न कचौरी निर्माताओं एवं फास्ट फूड सेंटरों का निरीक्षण कर कचौरी, खाद्य तेल, बेसन और लाल मिर्च पाउडर सहित कुल आठ खाद्य नमूने जांच के लिए संग्रहित किए।

यह कार्रवाई जिला कलक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. के निर्देशन में अभिहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र परमार के निर्देशन में की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी घनश्याम सिंह सोलंकी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत सबसे पहले मैसर्स भेरूनाथ नाश्ता सेंटर का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान मौके पर उपयोग किए जा रहे खाद्य तेल की गुणवत्ता की जांच टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड) मीटर से की गई। यहां तैयार कचौरी का नमूना भी लिया गया। विक्रेता को प्रतिष्ठान में साफ-सफाई बनाए रखने, गर्म कचौरी और समोसे अखबार में नहीं देने तथा उच्च गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

इसके बाद खाद्य सुरक्षा दल ने मैसर्स उदय राठौड़ पोहा हाउस का निरीक्षण कर बेसन, लाल मिर्च पाउडर और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने लिए। वहीं मैसर्स बालाजी चाट सेंटर पर उपयोग किए जा रहे खाद्य तेल की टीपीसी मीटर से जांच की गई, जो निर्धारित सीमा के अनुरूप पाई गई। यहां से भी खाद्य तेल का नमूना संग्रहित किया गया।

दल ने मैसर्स श्रीजी नमकीन एवं नाश्ता सेंटर का भी निरीक्षण किया। यहां विक्रेता को यूज्ड कुकिंग ऑयल के सुरक्षित उपयोग को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और मूंगफली तेल का नमूना जांच के लिए लिया गया।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी घनश्याम सिंह सोलंकी ने बताया कि कचौरी, समोसे और अन्य तली हुई खाद्य सामग्री तैयार करते समय खाद्य तेल का उपयोग खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। खाद्य तेल का बार-बार उपयोग करने से उसमें टोटल पोलर कंपाउंड की मात्रा बढ़ जाती है। नियमानुसार 25 प्रतिशत तक टीपीसी वाला तेल उपयोग योग्य माना जाता है, जबकि इससे अधिक टीपीसी वाला तेल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

उन्होंने बताया कि खाद्य कारोबारकर्ताओं को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से समय-समय पर री-यूज्ड कुकिंग ऑयल विषय पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती हैं। संग्रहित किए गए सभी आठ खाद्य नमूनों को जांच के लिए जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि किसी नमूने में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अभिहित अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र परमार ने बताया कि आमजन को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी खाद्य कारोबारकर्ताओं से अपील की कि वे वैध खाद्य अनुज्ञा (लाइसेंस/पंजीयन) प्राप्त कर ही खाद्य कारोबार संचालित करें और खाद्य अनुज्ञा पत्र को प्रतिष्ठान में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करें।

डॉ. परमार ने कहा कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मिलावटखोरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। अपराध सिद्ध होने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश पुष्करणा, निशा मीणा तथा सहायक शूरवीर सिंह उपस्थित रहे।

Tags:    

Similar News