RTE भुगतान का बजट जारी होने के बाद भी निजी स्कूलों में भारी आक्रोश, अधिकारियों का तबादला बना मुसीबत

प्रदेश में बजट और बिल तैयार होने के बावजूद आरटीई फीस पुनर्भरण राशि का भुगतान अटका हुआ है। प्रशासनिक तबादलों और स्पष्ट निर्देशों के अभाव में निजी स्कूल संचालकों में भारी आक्रोश है। जानिए क्या है पूरी समस्या और आगे क्या कदम उठाएगा संगठन।

Update: 2026-07-08 10:55 GMT

आमेट। राज्य में शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ रहे दुर्बल एवं असुविधाग्रस्त वर्ग के बच्चों की फीस पुनर्भरण राशि का मामला बजट मिलने के बावजूद अधर में लटका हुआ है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किए जाने और विभागीय स्तर पर बिल तैयार होने के बाद भी प्रदेशभर के निजी स्कूलों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। निजी स्कूल संगठनों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने भुगतान को लेकर अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन या निर्देश जारी नहीं किए हैं। दिशा-निर्देशों के अभाव में भुगतान की वास्तविक प्रक्रिया और राशि खातों में आने की समय सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे प्रदेशभर के स्कूल संचालक वित्तीय संकट और असमंजस से जूझ रहे हैं।

प्रशासनिक फेरबदल के कारण बढ़ती मुश्किलें इस माह भुगतान पर संशय पैदा कर रही हैं। निजी विद्यालय संगठन ने इस संबंध में जानकारी के लिए कार्यवाहक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी यानी सीडीईओ से संपर्क किया था, लेकिन प्रशासनिक तबादलों के चलते संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण हो गया है और वर्तमान में यह पद रिक्त है। जिले में कोई स्थाई जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने के कारण निजी स्कूलों को इस माह भी भुगतान मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है। भुगतान में हो रही इस देरी और प्रशासनिक शून्यता से नाराज निजी विद्यालय संगठन ने अब सीधे संवाद की राह अपना ली है। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि समस्या के त्वरित समाधान के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात करेगा। संगठन ने मांग की है कि प्रशासनिक एवं तकनीकी बाधाओं को दूर कर अटके हुए आरटीई भुगतान की प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाए।

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