जेतपुरा में एक साथ उठीं चार अर्थियां, सड़क हादसे ने उजाड़ा परिवार; ओम बिरला ने लिया संज्ञान

जयपुर सड़क हादसे ने जेतपुरा के एक परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। पिता और तीन मासूम बच्चों की मौत के बाद गांव में चूल्हे नहीं जले। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पीड़ित परिवार की मदद और बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का लिया संकल्प।

Update: 2026-07-08 14:50 GMT

तस्वीर में जेतपुरा के ग्रामीण एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार करते हुए दिख रहे हैं।

केलवा क्षेत्र की समीपवर्ती ग्राम पंचायत जेतपुरा में बुधवार को उस समय मातम पसर गया जब जयपुर के अजमेर रोड स्थित 200 फीट बाईपास पर हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चंद्रप्रकाश और उनके तीन मासूम बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। एक ही परिवार की चार अर्थियां एक साथ उठते देख पूरे गांव की आंखें नम हो गईं और शोक के कारण ग्रामीणों ने अपने घरों में चूल्हे तक नहीं जलाए। उल्लेखनीय है कि मंगलवार सुबह हुए इस दर्दनाक सड़क हादसे में जेतपुरा निवासी चंद्रप्रकाश और उनके तीन बच्चों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनका उपचार जयपुर के मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है।

इस हृदयविदारक घटना पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने बुधवार को मृतक चंद्रप्रकाश के बड़े भाई मीठालाल से दूरभाष पर बातचीत कर परिवार को ढांढस बंधाया और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। ओम बिरला ने बताया कि सुबह समाचार पत्रों के माध्यम से हादसे की जानकारी मिलते ही उन्होंने प्रशासन एवं चिकित्सा अधिकारियों से संपर्क कर घायल महिला के उपचार की स्थिति जानी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और उपचार में किसी भी स्तर पर कमी नहीं आने दी जाएगी। लोकसभा अध्यक्ष ने पीड़ित परिवार को उपचार से लेकर आजीविका तक हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

ओम बिरला ने जानकारी दी कि राज्य सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है और आवश्यकता पड़ने पर जनसहयोग के माध्यम से भी मदद की जाएगी। बातचीत के दौरान मीठालाल ने बताया कि हादसे के समय चंद्रप्रकाश के दो अन्य बच्चे घर पर ही थे, जिनमें से एक बच्चा दिव्यांग है। इस पर ओम बिरला ने दोनों बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण और उनके उज्ज्वल भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। बुधवार को जब अंतिम यात्रा गांव से निकली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।

Tags:    

Similar News