राजसमंद: कुमावत समाज प्रदर्शन पर 19 पर एफआईआर, गांवों में भाजपा का विरोध
नगर परिषद चुनाव के बाद प्रदर्शन में राजकार्य बाधा का केस दर्ज, नाराज ग्रामीणों ने भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर लगाए बैनर।
तस्वीर में राजसमंद में एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे समाज के लोग नजर आ रहे हैं।
राजसमंद में नगर परिषद चुनाव के बाद सियासी माहौल एक बार फिर गरमाता दिखाई दे रहा है। कुमावत समाज के आंदोलन के बाद 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने और दूसरी ओर कुछ गांवों में भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रवेश के विरोध में बैनर लगाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, कुमावत समाज की ओर से राजसमंद एसपी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया था। समाज की मांग थी कि बाड़ेबंदी में रखे गए कुमावत समाज के पार्षदों को बाहर लाया जाए और उनके परिजनों से उनकी बातचीत कराई जाए।
इस दौरान बड़ी संख्या में कुमावत समाज के जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और सामाजिक लोग एसपी कार्यालय के बाहर एकजुट हुए। प्रदर्शनकारी देर रात तक मौके पर डटे रहे। आंदोलन के दौरान उनके लिए मौके पर भोजन की व्यवस्था भी की गई।
इसी बीच कुमावत समाज के पार्षदों का एक वीडियो सामने आया, जिसमें पार्षद सुरक्षित नजर आए। पुलिस की ओर से यह वीडियो उनके परिजनों को भी दिखाया गया।
वहीं, पूरे घटनाक्रम के दौरान कुमावत समाज की ओर से नगर परिषद में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी मांग उठाई गई थी। समाज की ओर से कुमावत समाज के पार्षदों में से किसी एक को सभापति बनाए जाने की मांग की चर्चा भी सामने आई थी।
हालांकि, इसके बाद नगर परिषद में अनिता पालीवाल सभापति और मोहन कुमार उपसभापति चुने जा चुके हैं, लेकिन आंदोलन से जुड़ा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है।
अब इस मामले में राजनगर थाना पुलिस की ओर से करीब 19 लोगों के खिलाफ राजकार्य में बाधा और आचार संहिता का उल्लंघन से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है।
दूसरी तरफ कुमावत समाज की नाराजगी अब गांवों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। कुछ गांवों में भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रवेश के विरोध में बैनर लगाए जाने की बात सामने आई है। इससे राजसमंद की सियासत में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
एक तरफ आंदोलन के बाद 19 लोगों पर मुकदमा और दूसरी तरफ गांवों में भाजपा के विरोध में बैनर लगाए जाने से राजसमंद में नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। आंदोलन से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब मुकदमे और गांवों में सामने आए विरोध तक पहुंच चुका है।
अब यह मामला स्थानीय राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर नजर बनी हुई है। राजसमंद में मुकदमे से लेकर गांवों में लगे विरोध के बैनरों तक कुमावत समाज से जुड़ा यह पूरा घटनाक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है।