कपासन के खात्याखेड़ी में हजरत सैयद गुलाब शाह मस्तान उर्फ काले बाबा साहब का 30वां उर्स कुल की फातिहा के साथ संपन्न

कपासन के निकट खात्याखेड़ी स्थित हजरत सैयद गुलाब शाह मस्तान (र.अ.) उर्फ काले बाबा साहब का 30वां तीन दिवसीय सालाना उर्स कुल की फातिहा के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिन महफिल-ए-मिलाद, महफिल-ए-समां, अमीर खुसरो की कव्वाली और विशाल आम लंगर के बीच भाईचारे, अमन-चैन व तरक्की की दुआएं की गईं।

Update: 2026-07-29 11:10 GMT

तस्वीर में कपासन के खात्याखेड़ी स्थित दरगाह प्रांगण में 30वें सालाना उर्स के दौरान महफिल और दुआ में शामिल बड़ी संख्या में बैठे जायरीन नजर आ रहे हैं।

कपासन। निकटवर्ती खात्याखेड़ी स्थित हजरत सैयद गुलाब शाह मस्तान (र.अ.) उर्फ काले बाबा साहब का 30वां तीन दिवसीय सालाना उर्स कुल की फातिहा के साथ संपन्न हो गया। काले बाबा साहब के गादीनशी एडवोकेट सैयद अशफाक अली एवं सैयद ऐजाज अली ने बताया कि तीन दिवसीय उर्स के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं रूहानी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

उर्स के अंतिम दिन बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह शरीफ पहुंचे, जहां उन्होंने मन्नत की चादर एवं फूल पेश कर मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगी। अंतिम दिन महफिल-ए-मिलाद के बाद महफिल-ए-समां का आयोजन हुआ, जिसमें मशहूर कव्वालों ने एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम पेश कर जायरीनों को रूहानी सुकून से सराबोर कर दिया।

इसके बाद परंपरा के अनुसार रंग की महफिल आयोजित हुई, जिसमें सभी कव्वालों ने एक साथ मिलकर अमीर खुसरो की प्रसिद्ध कव्वाली "आज रंग है री माँ रंग है री, मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया" का मुश्तरका (संयुक्त) गायन किया। अमीर खुसरो के इस सूफियाना कलाम की गूंज से पूरा आस्ताना-ए-आलिया रूहानी रंगों से सराबोर हो उठा और उपस्थित जायरीन अकीदत में सराबोर होकर झूमते नजर आए।

तीन दिवसीय उर्स का समापन कुल की फातिहा ख्वानी के साथ हुआ। फातिहा के दौरान देश-दुनिया में भाईचारे और तरक्की के लिए दुआ की गई। फातिहा ख्वानी के पश्चात दरगाह शरीफ में विशाल आम लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी जायरीनों एवं अकीदतमंदों को तबर्रुक (लंगर) तकसीम किया गया। इसी के साथ 30वें तीन दिवसीय सालाना उर्स का विधिवत समापन हो गया।

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