गुरु पूर्णिमा पर गुरु महिमा को समर्पित अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" की भावपूर्ण कविता ने जीता मन
गुरु पूर्णिमा पर कांकरोली, राजसमंद की अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" की भावपूर्ण कविता में गुरु की महिमा, संस्कार, अनुशासन और श्रद्धा का मार्मिक चित्रण किया गया है।
तस्वीर में राजसमंद निवासी कवयित्री अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" नजर आ रही हैं।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कांकरोली, राजसमंद की अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" ने गुरु की महिमा, ज्ञान, अनुशासन और संस्कारों को समर्पित एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की है। कविता में गुरु कृपा की महत्ता, जीवन में उनके मार्गदर्शन और व्यक्तित्व निर्माण में उनकी भूमिका को श्रद्धापूर्वक अभिव्यक्त किया गया है।
कविता की शुरुआत पूर्णिमा के चंद्रमा और गुरु कृपा की शीतलता के उल्लेख से होती है, जिसमें गुरु को अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करने वाला बताया गया है। रचना में गुरु को शब्दों और अक्षरों से परे मौन में प्रवाहित होने वाले निर्मल ज्ञान का स्वरूप बताते हुए भटके हुए पथिक को सही मार्ग दिखाने तथा गिरते हुए व्यक्ति का साहस बढ़ाने वाला बताया गया है।
कविता के अगले चरणों में गुरु की फटकार को भविष्य का वरदान और उनके आशीर्वाद को सफलता का आधार बताया गया है। रचना में यह भी व्यक्त किया गया है कि गुरु ने त्रुटियों पर टोका, सफलता पर अपनापन दिया और उसी अनुशासन ने एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा प्रदान की।
कविता में गुरु के उपकारों को असीम बताते हुए उनके ऋण को कभी न चुका पाने की भावना व्यक्त की गई है। साथ ही यह संकल्प भी व्यक्त किया गया है कि गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर उनके दिए संस्कारों को अपनी पहचान बनाया जाएगा तथा उनके पदचिह्नों को जीवन की राह का मार्गदर्शक माना जाएगा।
रचना के समापन में पूर्णिमा की चांदनी को श्रद्धा का साक्षी बताते हुए गुरुदेव से इस सम्मान को स्वीकार करने की प्रार्थना की गई है। अंत में संस्कृत के प्रसिद्ध गुरु मंत्र "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः" के साथ गुरु के प्रति श्रद्धा और नमन व्यक्त किया गया है। इस भावपूर्ण रचना की रचनाकार अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" हैं, जो कांकरोली, राजसमंद की निवासी हैं।