जलझूलनी एकादशी पर खमनोर में निकली ठाकुरजी की शोभायात्राएं, बनास तट पर हुआ प्रभु मिलन
जलझूलनी एकादशी पर खमनोर में ठाकुरजी की शोभायात्राएं निकलीं। विभिन्न मंदिरों से निकले बेवाण बनास नदी तट स्थित दत्तात्रेय आश्रम पहुंचे, जहां प्रभु स्वरूपों का मिलन, सरोवर विहार और गणपति विसर्जन हुआ।
तस्वीर में खमनोर के मंदिर में जलझूलनी एकादशी के अवसर पर सजाए गए चारभुजानाथ के विग्रह स्वरूप और धार्मिक झांकी नजर आ रही है।
खमनोर (प्रातः काल संवाददाता)। जलझूलनी एकादशी पर खमनोर कस्बे में ठाकुरजी की शोभायात्राएं धूमधाम से निकाली गईं। ब्रह्मपुरी स्थित चारभुजानाथ मंदिर से ठाकुरजी के विग्रह स्वरूप को बेवाण में विराजित कर शोभायात्रा निकाली गई। इसमें 24 श्रेणी पालीवाल समाज सहित आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हुए। बैंड-बाजों, अश्वों और ऊंटों के साथ निकली शोभायात्रा में श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ शामिल हुए।
इसी प्रकार पुरानी तहसील रोड स्थित चारभुजानाथ मंदिर से भी ठाकुरजी का बेवाण सजाकर शोभायात्रा निकाली गई। मोलेला से भी ठाकुरजी का बेवाण शोभायात्रा के साथ बनास नदी के तट पहुंचा। सभी शोभायात्राएं नगर भ्रमण के बाद बनास नदी के तट स्थित दत्तात्रेय आश्रम पहुंचीं। यहां सभी प्रभु स्वरूपों का मिलन हुआ। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रभु स्वरूपों के दर्शन किए।
दत्तात्रेय आश्रम में ठाकुरजी का सरोवर विहार कराया गया। इत्र और पुष्पों से सुवासित जल से ठाकुरजी को स्नान कराया गया। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जलझूलनी एकादशी के अवसर पर गणपति विसर्जन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
इसके बाद ठाकुरजी के बेवाण पुनः मंदिर पहुंचे। यहां ठाकुरजी को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ निज मंदिर में विराजित किया गया। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और ठाकुरजी के दर्शन किए। अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।