हज़रत दीवाना शाह साहब के जन्मदिन पर आज होगी परचम कुशाई, 85वें उर्स की चहल-पहल होगी शुरू

हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. के यौमे विलादत पर 11 जुलाई को परचम कुशाई होगी। इसी के साथ 85वें उर्स की तैयारियां और जायरीन का आगमन शुरू होगा।

Update: 2026-07-10 08:08 GMT

तस्वीर में कपासन स्थित हज़रत दीवाना शाह साहब की दरगाह का भव्य बुलंद दरवाजा और उसका बाहरी परिसर दिखाई दे रहा है।                                                                                                                                                          

प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. के यौमे विलादत (जन्मदिवस) के अवसर पर 25 मोहरर्म, शनिवार 11 जुलाई को कपासन में परचम कुशाई (झंडा चढ़ाने) की रस्म अदा की जाएगी। इसी रस्म के साथ बाबा हुजूर के 85वें उर्स की तैयारियों और चहल-पहल का विधिवत आगाज़ होगा।

दरगाह वक्फ कमेटी के ऑफिस सैक्रेट्री शफी मोहम्मद छीपा ने बताया कि बाबा हुजूर के यौमे पैदाइश के मौके पर शनिवार को नमाज़-ए-असर के बाद आस्ताना-ए-आलिया एवं बुलंद दरवाजा पर परंपरा के अनुसार परचम कुशाई (अलम) की रस्म अदा की जाएगी। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के शामिल होने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि इस मुबारक अवसर पर अहमद कबीर मंजिल में शनिवार प्रातः 11 बजे से दीवाना शाह माध्यमिक विद्यालय एवं मदरसा दीवाना शाह के छात्र-छात्राओं द्वारा हम्द, नात, बाबा हुजूर की शान में मनकबत तथा तकरीर पेश की जाएगी।

बाबा हुजूर हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. का जन्म डीसा-पालनपुर, जिला बनासकांठा (गुजरात) के कुरेशी मोहल्ला में 25 मोहरर्म 1292 हिजरी, 4 मार्च 1875 ईस्वी, गुरुवार के दिन अब्दुल कादिर कुरेशी के घर जेनब बाई की कोख से हुआ था। इसी खुशी की याद में प्रतिवर्ष अलम पेश करने की रस्म अदा की जाती है।

बाबा हुजूर का 85वां उर्स इंशा अल्लाह 21 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई (6 सफर से 8 सफर) तक आयोजित होगा। उर्स का समापन 23 जुलाई को जोहर की अज़ान से पहले कुल की फातिहा के साथ होगा। झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ ही 85वें उर्स की चहल-पहल शुरू हो जाएगी और जायरीन के आने-जाने का सिलसिला भी प्रारंभ हो जाएगा।

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