आमेट के हाथी माता श्मशान घाट की अव्यवस्था पर ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

आमेट नगर के श्मशान घाट में टीनशेड की बदहाली और फर्श के अभाव से अंतिम संस्कार में हो रही परेशानी को लेकर नगर पालिका प्रशासन से सुधार की मांग की गई है।

Update: 2026-07-02 12:37 GMT

आमेट में श्मशान घाट की समस्याओं के समाधान हेतु स्थानीय नागरिक नगर पालिका के अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए।

आमेट नगर के चंद्रभागा नदी तट पर स्थित हाथी माता श्मशान घाट इन दिनों उपेक्षा का दंश झेल रहा है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्थाओं से जूझ रहे स्थानीय ग्रामीणों ने अब इसके कायाकल्प के लिए मोर्चा खोल दिया है। श्मशान घाट की जीर्ण-शीर्ण स्थिति और मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली विकट परिस्थितियों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

नगर के जागरूक नागरिकों ने इस संबंध में एक सामूहिक ज्ञापन शिविर प्रभारी एवं अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका आमेट को सौंपा है। ज्ञापन में रेखांकित किया गया है कि श्मशान घाट पर लगी सुरक्षात्मक लोहे की चादरें पूर्णतया क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिसके कारण वर्षा का जल सीधे चिता पर गिरता है। यह स्थिति न केवल धार्मिक रीति-रिवाजों में बाधा उत्पन्न करती है, बल्कि शोक संतप्त परिजनों के लिए अत्यंत पीड़ादायक होती है। इसके अतिरिक्त, श्मशान परिसर में फर्श कच्चा होने के कारण जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिससे शव यात्रा को श्मशान तक ले जाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से क्षतिग्रस्त टीनशेड को हटाकर वहां नई शीट लगवाने और परिसर में इंटरलॉकिंग ब्लॉक अथवा पक्का फर्श निर्माण की पुरजोर मांग की है। इस ज्ञापन पर नारायण सिंह भाटी, जमनालाल, भंवरलाल, रणसिंह, उमेद सिंह, शंभू दास, बंसीलाल सेन, प्रमोद शर्मा, शांतिलाल जीनगर एवं शंभु लाल सहित कई गणमान्य नागरिकों के हस्ताक्षर अंकित हैं। प्रशासन के समक्ष रखी गई यह मांग केवल सुविधा विस्तार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी एक बुनियादी आवश्यकता है। अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन कब तक इन समस्याओं का समाधान कर अंतिम संस्कार की गरिमा को बहाल करता है।

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