कावेरी विवाद के बीच बीजेपी अध्यक्ष की थलपति विजय से अपील, मेकेदातु बांध पर सहयोग का रखा प्रस्ताव|
मेकेदातु परियोजना पर सहयोग की अपील करते हुए कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष ने बातचीत के जरिए कावेरी जल विवाद का समाधान निकालने और दोनों राज्यों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।
बी. वाई. विजयेंद्र और थलपति विजय से संबंधित यह दृश्य केवल सांकेतिक है।
बेंगलुरु: कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जारी राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव के बीच कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय को पत्र लिखकर बातचीत और सहयोग के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। अपने पत्र में उन्होंने दोनों राज्यों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान संवाद और आपसी विश्वास से ही संभव है। उन्होंने मेकेदातु परियोजना को भी दोनों राज्यों के हितों से जोड़ते हुए समर्थन की अपील की।
कावेरी जल विवाद को लेकर हाल के दिनों में दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। इसी बीच मुख्यमंत्री स्तर पर प्रस्तावित बैठक भी नहीं हो सकी, जिसके बाद इस मुद्दे पर नई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में बी. वाई. विजयेंद्र ने थलपति विजय को संबोधित पत्र जारी किया।
अपने पत्र में विजयेंद्र ने लिखा कि पड़ोसी राज्यों के बीच मतभेद होना असामान्य नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि ऐसे मुद्दों का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है। उन्होंने बेंगलुरु में स्थापित तिरुवल्लुवर की प्रतिमा से जुड़े पुराने विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने परिपक्वता और संवाद के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाला था। उनके अनुसार, यह उदाहरण दर्शाता है कि जब जनता के व्यापक हितों को प्राथमिकता दी जाती है तो जटिल विवादों का भी समाधान संभव हो जाता है।
विजयेंद्र ने पत्र में आगे कहा कि इसी भावना के साथ वह मुख्यमंत्री थलपति विजय से अपील कर रहे हैं कि कावेरी नदी को विवाद का विषय बनाने के बजाय सहयोग का माध्यम बनाया जाए। उन्होंने लिखा कि कावेरी नदी केवल सिंचाई का स्रोत नहीं, बल्कि बेंगलुरु और कावेरी बेसिन के कई शहरों तथा कस्बों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में रहने वाले कन्नड़ और तमिल दोनों समुदाय अपनी पेयजल आवश्यकताओं के लिए इस नदी पर निर्भर हैं।
पत्र में उन्होंने वर्तमान मौसम की स्थिति का भी उल्लेख किया। विजयेंद्र ने कहा कि अपर्याप्त और अनियमित मानसून के कारण किसानों और आम नागरिकों पर अतिरिक्त दबाव बना है। ऐसे समय में दोनों राज्यों की सरकारों को लोगों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मेकेदातु परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना बेंगलुरु की बढ़ती पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने पत्र में कहा कि इस परियोजना से तमिलनाडु की वैध जल आवश्यकताओं से समझौता किए बिना कर्नाटक की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री थलपति विजय से अनुरोध किया कि इस परियोजना को प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की भावना से देखा जाए।
पत्र के अंत में विजयेंद्र ने विश्वास व्यक्त किया कि तमिलनाडु सरकार ऐसा संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाएगी, जिससे दोनों राज्यों के हितों का सम्मान बना रहे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच वर्षों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी लिखा कि कावेरी नदी दोनों राज्यों के लोगों को जोड़ने का माध्यम बने, न कि विभाजन का कारण।
कावेरी जल विवाद लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में बी. वाई. विजयेंद्र का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों राज्यों के बीच संवाद और सहयोग को लेकर नई पहल की चर्चा हो रही है। अब इस पत्र पर तमिलनाडु सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।