मानसून सत्र से पहले सख्त नियम- संसद परिसर में अब नो नारेबाजी, नो स्मार्ट गैजेट्स, मानसून सत्र के लिए नई गाइडलाइंस|
सुरक्षा और गोपनीयता के मद्देनजर सांसदों को स्मार्ट वॉच, चश्मे और नारेबाजी से बचने की सख्त हिदायत।

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान सदन का दृश्य, जहाँ सुरक्षा और अनुशासन को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं।
संसद के आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर लोकसभा सचिवालय ने सांसदों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इस निर्देश के तहत सांसदों को संसद परिसर के भीतर स्मार्ट वॉच, स्मार्ट चश्मा और पेन कैमरा जैसे अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए इन उपकरणों पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है, क्योंकि इनके कुछ फीचर संसदीय विशेषाधिकारों का हनन कर सकते हैं और परिसर की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी यह बुलेटिन सांसदों के आचरण और परिसर की मर्यादा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। सचिवालय ने अपने परामर्श में कहा है कि बाजार में उपलब्ध एडवांस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और उनसे जुड़ी तकनीकें जिस तरह से प्राइवेसी में सेंध लगा सकती हैं, उसे देखते हुए सदस्यों को सचेत रहने की आवश्यकता है। यह निर्देश 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र के दौरान पूर्णतः प्रभावी रहेगा, ताकि सदन की कार्यवाही बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से संचालित की जा सके।
सांसदों को केवल तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल से ही नहीं, बल्कि परिसर के भीतर प्रदर्शन करने की गतिविधियों से भी बचने का कड़ा निर्देश दिया गया है। सचिवालय ने विशेष रूप से विरोध-प्रदर्शन, नारेबाजी, तख्तियां लहराने और धरना आयोजित करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई है। इसके अलावा, संसद भवन के प्रवेश द्वारों पर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन के आयोजन पर मनाही है, क्योंकि इससे सदनों की बैठक के दौरान सांसदों के आवागमन में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है। सचिवालय के संज्ञान में यह बात भी आई है कि हाल के दिनों में एआई (AI) द्वारा तैयार किए गए चित्रों और आपत्तिजनक नारों वाली तख्तियों का उपयोग बढ़ा है, जिसे लेकर सांसदों को सतर्क किया गया है।
संसद भवन परिसर की पवित्रता और संसदीय गरिमा को बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के शस्त्र, लाठियां, भाले, तलवारें या डंडे लाने पर भी कड़ा प्रतिबंध है। इसके साथ ही, धार्मिक अनुष्ठान या हड़ताल जैसे आयोजन करना भी नियमों के विरुद्ध माना गया है। अतीत में कई मौकों पर तख्तियां दिखाने और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित होने और कामकाज बाधित होने की घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सचिवालय का यह प्रयास सुनिश्चित करना है कि देश की सर्वोच्च विधायी संस्था का परिसर शांतिपूर्ण रहे और संसदीय कार्यों में किसी भी प्रकार का अवरोध पैदा न हो।

Lalita Rajput
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