'गोमूत्र विशेषज्ञ' टिप्पणी पर संसद में बवाल, प्रियंका गांधी के बयान से गरमाई शिक्षा सुधार की बहस|
संसद में शिक्षा सुधार पैनल के सदस्य वी कामकोटी को गोमूत्र विशेषज्ञ कहे जाने पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है और सत्ता पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है।
तस्वीर में बाएं से दाएं: आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी और लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा संसद सत्र के दौरान।
लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान उस समय राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार के शिक्षा सुधार पैनल के एक सदस्य को गोमूत्र विशेषज्ञ करार दिया। इस तीखी टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और इसे एक प्रतिष्ठित अकादमिक हस्ती का अपमान बताया। प्रियंका गांधी का यह निशाना स्पष्ट रूप से आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि पर था, जो नीट पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में बड़े सुधारों के लिए गठित मल्टी-डिसिप्लिनरी पैनल के छह विशेषज्ञों में से एक हैं।
विवाद की जड़ में वह पृष्ठभूमि है जब पैनल के गठन और शिक्षा सुधारों के सरकारी नजरिए पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सांसद ने यह टिप्पणी की। राजनीतिक जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान प्रोफेसर कामकोटि द्वारा जनवरी 2025 में चेन्नई की एक गौशाला में 'माटू पोंगल' कार्यक्रम के दौरान दिए गए एक भाषण से जुड़ा हुआ है। उस कार्यक्रम में उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और जैविक खेती के संदर्भ में देसी गाय की नस्लों के महत्व पर जोर दिया था तथा गोमूत्र के कथित एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और पाचन संबंधी गुणों का जिक्र किया था। भाजपा नेताओं और समर्थकों का तर्क है कि इस तरह के एक विशेष बयान के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कंप्यूटर वैज्ञानिक को सिर्फ गोमूत्र विशेषज्ञ कहकर पुकारना उनकी दशकों की शैक्षणिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों को सुनियोजित तरीके से नजरअंदाज करना है।
प्रोफेसर वी. कामकोटि का अकादमिक और पेशेवर सफर अत्यंत विशिष्ट रहा है। उन्होंने आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में एम.एस. और पीएचडी की डिग्री हासिल की और वर्ष 2001 में इस प्रतिष्ठित संस्थान की फैकल्टी के रूप में जुड़े, जिसके बाद जनवरी 2022 में उन्हें आईआईटी मद्रास का निदेशक नियुक्त किया गया। कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी और वीएलएसआई डिजाइन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले कामकोटि आईआईटी मद्रास में माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम और इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम के प्रमुख होने के साथ-साथ नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स की अध्यक्षता भी की है।
उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों का दायरा यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और सम्मेलनों के लिए 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, कई डॉक्टरेट छात्रों का मार्गदर्शन किया है और सरकार तथा उद्योग जगत द्वारा वित्तपोषित लगभग 50 अनुसंधान परियोजनाओं का नेतृत्व किया है। वे भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की प्रौद्योगिकी समितियों के सदस्य भी हैं। उनकी इन उत्कृष्ट सेवाओं और अनुसंधान कार्यों के लिए उन्हें पद्म श्री के साथ-साथ डीआरडीओ एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड, अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप, आईबीएम फैकल्टी अवार्ड और वासविक इंडस्ट्रियल रिसर्च अवार्ड जैसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
संसद के भीतर हुए इस वाकये के बाद से सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार की नीतियों और पैनल में शामिल चेहरों को लेकर हमलावर है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष का कहना है कि राजनीतिक विरोध के चलते देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की गरिमा को ठेس पहुंचाई जा रही है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर शिक्षा सुधारों और राजनीतिक बयानों के बीच छिड़ी बहस को राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र में ला खड़ा किया है, जिसके दूरगामी राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।