Anti Paper Leak Bill पर ओवैसी ने सरकार को घेरा,बोले- कानून नहीं, पूरी परीक्षा व्यवस्था बदलनी होगी|
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कई सुझाव दिए।
संसद भवन में लोकसभा के सत्र के दौरान भाषण देते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी।
संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के अवसर पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने देश की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा प्रशासनिक और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह चरमरा चुकी है, जिसे तत्काल प्रभाव से बदलने की आवश्यकता है। यदि इस गंभीर मुद्दे पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में सरकार के सामने बड़ी प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
सदन में अपने संबोधन की शुरुआत एक शेर के माध्यम से करते हुए ओवैसी ने सरकार की नीतियों पर कटाक्ष किया। नीट यूजी विवाद और छात्रों से जुड़े विभिन्न प्रकरणों का हवाला देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन और शैली पर तंज कसते हुए कहा कि आज 'मित्रों' से लेकर जेन-जी पीढ़ी के 'हेलो फ्रेंड' तक के दौर में देश का युवा तमाम विसंगतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने उन मेधावी छात्रों के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया जिनकी जिंदगियां और भविष्य पेपर लीक जैसी अनियमितताओं की भेंट चढ़ गए हैं।
पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या केवल कानून में बदलाव करने, सेल्फी वीडियो तैयार करने, या स्पेशल टास्क फोर्स व फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर देने से वे अमूल्य जानें वापस लाई जा सकती हैं? उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की वास्तविक तकलीफों को समझने में विफल साबित हो रही है। इसके साथ ही, उन्होंने परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भारतीय वायुसेना के कथित इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि नागरिक प्रशासनिक कार्यों के लिए इस प्रकार के तौर-तरीके अपनाना उचित नहीं है।
चर्चा के दौरान न्यायिक प्रणाली के लंबित मामलों का आंकड़ा रखते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए भारी मात्रा में राशि आवंटित हुई है, इसके बावजूद देश की अदालतों में लाखों मामले लंबित पड़े हैं। केवल सतही कमेटियां बनाने या विशेष कार्य बल गठित करने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रणाली के ढांचे को दुरुस्त करना होगा।
सरकार के समक्ष ठोस सुझाव रखते हुए ओवैसी ने सिफारिश की कि परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित एक विशाल प्रश्न बैंक तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह वर्जित हो। इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली को अत्यधिक मजबूत और त्रुटिहीन बनाए जाने की अनिवार्यता पर जोर दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कड़े कानूनों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा और युवाओं का लोकतांत्रिक संस्थाओं से भरोसा डिगा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।