संसद भवन में अपने भाषण के दौरान हाथ उठाकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोलते शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'इंडिया' गठबंधन की रैली को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 25 से 30 वर्षों के दौरान उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में इस तरह की इतनी विशाल रैली पहले कभी नहीं देखी है। सांसद अरविंद सावंत ने रामलीला मैदान में जुटी भीड़ का उदाहरण देते हुए बताया कि वे लोग दोपहर 12 बजे मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से निकले थे, लेकिन भारी भीड़ और जाम के कारण दोपहर 3 बजे ही रामलीला मैदान के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंच पाए। वहां लोगों की इतनी अधिक मौजूदगी थी कि गाड़ियां एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

रामलीला मैदान का इतिहास और सरकार पर 'रावण' का तंज

राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) सांसद सावंत ने कहा कि जब भी रामलीला मैदान में कोई बड़ा आंदोलन या विरोध-प्रदर्शन हुआ है, हमेशा 'रावण' की हार हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार की उन गतिविधियों के खिलाफ है जो उनकी नजर में रावण जैसा काम कर रही हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए सावंत ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन केवल किसी एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। ज्ञानेश कुमार तो महज एक प्रतिनिधि हैं। सावंत ने उन्हें कठपुतली करार देते हुए आरोप लगाया कि उनकी डोर किसी और के हाथ में है और कोई दूसरा व्यक्ति बटन दबाकर उन्हें अपने हिसाब से चला रहा है।

दिल्ली पुलिस और मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

सांसद अरविंद सावंत ने पुलिस की भूमिका और कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने मुंबई और दिल्ली पुलिस का जिक्र करते हुए कहा कि वर्दी पहनने वाले अधिकारियों को किसी की गुलामी नहीं करनी चाहिए। पुलिस के रवैये पर तंज कसते हुए सावंत ने कहा कि पहले बच्चों को हिरासत में लिया जाता है और फिर बाद में उन्हीं को रैली निकालने की इजाजत दे दी जाती है।

उन्होंने तुषार गांधी के साथ हुए व्यवहार की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बीते दिन किस तरह तुषार गांधी को घसीटकर पुलिस गाड़ी में बैठाया गया। सावंत ने पुलिस प्रशासन से हाथ जोड़कर अपील की कि वे गुलाम न बनें और कानून व्यवस्था का पालन करते हुए सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दें। उन्होंने याद दिलाया कि भारत के संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता की गारंटी दी है।

'ड्रामा क्वीन' और मुख्य अभिनेता कौन? विपक्ष का पलटवार

विपक्ष पर लगाए जाने वाले आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सावंत ने कहा कि विपक्ष को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा संवैधानिक हक है। उन्होंने सत्तापक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वास्तव में ड्रामा तो वे लोग खुद करते आए हैं। वे रोते हैं, चिल्लाते हैं और दूसरों को गालियां देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने यही तरीका अपनाया है और पूरा देश तथा दुनिया यह देख रही है कि असली 'ड्रामा क्वीन' और इसका मुख्य अभिनेता आखिर कौन है।

बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और सोनिया गांधी के 'बड़े दिल' की तारीफ

अपनी पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए सावंत ने कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पूरी निष्ठा के साथ दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा, सिद्धांतों और मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब भी राहुल गांधी या महा विकास अघाड़ी (MVA) की रैलियां होती हैं, विरोधी पक्ष केवल कांग्रेस के इतिहास के पुराने पन्ने पलटने लगता है और ज्ञानेश कुमार से जुड़े सवालों के सीधे जवाब देने से बचता है।

विपक्षी नेताओं के व्यवहार की तुलना करते हुए सावंत ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के बड़े दिल की सराहना की। उन्होंने याद दिलाया कि सोनिया गांधी ने तो अपने पति और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल लोगों की रिहाई तक के लिए पत्र लिख दिया था। सावंत ने सवाल किया कि क्या आज के दौर में इतनी बड़ी सोच और इतना बड़ा दिल रखने वाला कोई अन्य राजनीतिक व्यक्तित्व नजर आता है?