शिवसेना गुटों के विलय पर बोले हेमंत पाटिल, शिंदे के फैसले को बताया अहम
शिंदे गुट के एमएलसी हेमंत पाटिल ने कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है और दोनों गुटों का एकीकरण पार्टी नेतृत्व एकनाथ शिंदे के अंतिम फैसले पर निर्भर करता है।
महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के विलय पर हेमंत पाटिल के बयान के बाद राजनीति तेज हुई।
महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों शिवसेना गुटों के एकजुट होने की संभावनाओं को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना शिंदे गुट के विधान परिषद सदस्य एवं विधायक हेमंत पाटिल के ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। पाटिल ने कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि जिनके खिलाफ जिंदगी भर हथियार उठाए, आज उन्हीं के साथ बैठने का वक्त आ चुका है।
दोनों शिवसेनाओं के एकजुट होने की संभावनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हेमंत पाटिल ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में एकनाथ शिंदे जो भी उचित फैसला लेंगे, वह पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह स्वीकार होगा।
हेमंत पाटिल ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिवसैनिकों के आपसी संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही शिवसेना के दो हिस्से हो चुके हैं और दो अलग-अलग संगठन बन गए हैं, लेकिन आम शिवसैनिकों के बीच एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता आज भी बरकरार है। दोनों गुटों के शिवसैनिक एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं और जरूरत पड़ने पर साथ खड़े दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि शिवसेना में विभाजन नहीं हुआ होता और संगठन एकजुट रहता, तो आज पूरे महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य अलग होता। पाटिल ने नांदेड जिले का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में वहां पार्टी और कार्यकर्ताओं को जिस संघर्ष और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसी स्थिति कभी पैदा नहीं होती।
भाजपा से मतभेद और पालकमंत्री को पहल करने की सलाह
हेमंत पाटिल ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन में भाजपा और शिवसेना के संबंधों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना के बीच निश्चित रूप से मतभेद मौजूद हैं।
इन विवादों को समाप्त करने के लिए उन्होंने जिले के पालकमंत्री से स्वयं पहल करने और स्थानीय स्तर पर चल रहे मतभेदों को जल्द सुलझाने की अपील की।
महायुति गठबंधन पर भी दिया बयान
गठबंधन की मौजूदा स्थिति पर हेमंत पाटिल ने कहा कि फिलहाल महायुति में कोई बड़ी दरार या खटास नहीं आई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेताओं को मौजूदा परिस्थितियों पर समय रहते गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत पैदा हो चुकी है।
हेमंत पाटिल के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि क्या भविष्य में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के बीच दोबारा राजनीतिक तालमेल की संभावना बन सकती है। फिलहाल दोनों शिवसेना गुटों के एकीकरण को लेकर अंतिम निर्णय एकनाथ शिंदे के हाथ में है, लेकिन पाटिल की टिप्पणी ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।