स्वाध्याय दिवस पर साध्वी निर्वाणश्री का संदेश, बोलीं- आत्मा का दर्पण है स्वाध्याय
मुंबई के चेम्बूर में स्वाध्याय दिवस पर विशेष आराधना के दौरान विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने स्वाध्याय को आत्मा का दर्पण बताते हुए भगवान महावीर के पराक्रम और पुरुषार्थ के संदेश पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कई साध्वियों ने प्रेरक विचार रखे।
तस्वीर में चेम्बूर में आयोजित स्वाध्याय दिवस विशेष आराधना कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठीं विदुषी साध्वी निर्वाणश्री और अन्य साध्वियां नजर आ रही हैं।
मुंबई। चेम्बूर में स्वाध्याय दिवस पर विशेष आराधना के अवसर पर उपस्थित विशाल जनमेदिनी को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि स्वाध्याय आत्मा का दर्पण है। उन्होंने भगवान महावीर द्वारा पराक्रम और पुरुषार्थ को दिए गए सर्वाधिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान ने कहा था, “पुरिसा ! परक्कमेज्जा” अर्थात हे पुरुष, तुम पराक्रम करो।
साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि भगवान ने काल, स्वभाव, नियति, कर्म और पुरुषार्थ, इन पाँच तत्त्वों के आधार पर हर घटना की व्याख्या की है। ये पाँच समवाय हर संसारी प्राणी के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि तत्त्व की ये बातें हमें शास्त्र-अध्ययन या प्रवचन श्रवण से जानने को मिलती हैं।
साध्वी योगक्षेमप्रज्ञा ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्युषण महापर्व अध्यात्म की ऊँचाइयों को छूने का पर्व है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों का चरित्र वह प्रेरणा प्रदीप है, जो सघन अंधकार में भी नया प्रकाश और नया उल्लास पैदा करता है। भगवान ऋषभ की तरह भवों की यात्रा आत्म विकास की विलक्षण यात्रा है और इसका श्रवण करने से हम भी ऊर्ध्वारोहण कर सकते हैं।
साध्वी कुंदनयशा ने स्वाध्याय की महत्ता प्रतिपादित करते हुए उपस्थित जनमेदिनी को स्वाध्याय की प्रेरणा दी। वहीं, साध्वी मुदितप्रज्ञा ने ‘श्रुत सागर लहराए’ गीत की मधुर संगीतमय प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के सामूहिक जप से हुआ। प्रारंभ में साध्वी ने ध्यान का प्रयोग भी करवाया। मंगलाचरण घाटकोपर तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने किया, जबकि मंच संचालन रीना धाकड़ ने किया। चेम्बूर में आयोजित इस विशेष आराधना में स्वाध्याय, शास्त्र-अध्ययन, प्रवचन श्रवण और आत्म विकास के संदेश के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।