तस्वीर में जलाशय के किनारे पोकलेन और खुदाई की मशीनें गाद निकालती दिख रही हैं।

मुंबई। मुंबई की भविष्य की पानी की जरूरतों को देखते हुए झीलों और बांधों में जमा गाद निकालने की योजना अब प्रायोगिक चरण में पहुंच गई है। महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने राज्य के 7 बड़े बांधों से प्रायोगिक तौर पर गाद और बालू निकालने को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से मिलने वाले अनुभव और आंकड़ों के आधार पर मुंबई की विहार और तुलसी झीलों से गाद निकालने को लेकर आगे की रणनीति तय होगी।

बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राज्य के इन 7 प्रमुख प्रोजेक्ट्स में गाद निकालने का काम सफल होने के बाद ही मुंबई की विहार और तुलसी झील से मिट्टी निकालने का काम शुरू किया जाएगा। वहीं तानसा, मोडक सागर और मध्य वैतरणा जैसी बड़ी झीलों में गाद की मात्रा काफी कम होने के कारण फिलहाल वहां से मिट्टी निकालने की जरूरत नहीं है।

राज्य सरकार के पायलट प्रोजेक्ट में सोलापुर का उजनी, नाशिक का गिरणा, भंडारा का गोसीखुर्द, अहिल्यानगर का मुला, संभाजीनगर का जायकवाड़ी, जलगांव का हतनूर और सातारा का कोयना बांध शामिल हैं। इन सातों प्रोजेक्ट्स में सिंचाई विकास निगम के माध्यम से गाद निकाली जाएगी।

इस प्रक्रिया से मिलने वाले अनुभवों और आंकड़ों के आधार पर ही बीएमसी अपने अधीन आने वाले जलाशयों के लिए आगे की रणनीति बनाएगी। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने स्थायी समिति की बैठक में जानकारी दी कि केंद्रीय जल आयोग के नियमों के अनुसार जब तक पानी की भंडारण क्षमता में सालाना 0.2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट नहीं आती, तब तक गाद निकालना जरूरी नहीं होता।

तानसा, मोडक सागर और मध्य वैतरणा में पानी की भंडारण क्षमता में सालाना गिरावट 0.2 प्रतिशत से कम है। ऐसे में इन जलाशयों में केवल नियमित निगरानी की आवश्यकता है। इसके विपरीत मुंबई की पुरानी विहार और तुलसी झीलों में 15 से 16 प्रतिशत तक गाद जमा हो चुकी है।

राज्य के सातों प्रोजेक्ट्स की सफलता के बाद बीएमसी विहार और तुलसी झील से गाद निकालने का काम हाथ में लेगी। इससे मुंबई की पानी भंडारण क्षमता में बढ़ोतरी होगी। राज्य के पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे मुंबई के इन दोनों जलाशयों में गाद निकालने की आगे की कार्रवाई का आधार बनेंगे।

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