नालासोपारा में महावितरण प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है। वसई-विरार में बिना किसी पूर्व सूचना के बार-बार और घंटों तक हो रही बिजली कटौती से नागरिक परेशान हैं। बिजली आपूर्ति में व्यवधान के साथ स्मार्ट मीटर, बढ़े हुए बिजली बिल और उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्रभावी समाधान नहीं होने को लेकर BJP वसई-विरार जिला महासचिव मनोज बारोट ने महावितरण कार्यालय पर मार्च निकालने की बात कही है।

मनोज बारोट ने कहा कि महावितरण को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्मार्ट मीटर, बढ़े हुए बिजली बिल और उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्रभावी तरीके से समाधान करने की जरूरत है। उम्मीद के मुताबिक कार्रवाई नहीं होने पर अब महावितरण कार्यालय पर मार्च निकालने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा कि BJP सत्ता में है, इसलिए यह ऐसी पार्टी नहीं है जो लोगों की समस्याओं पर चुप रहे। इसके विपरीत, प्रशासन की गलतियों को सामने लाकर लोगों को न्याय दिलाना BJP की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्मार्ट मीटर को लेकर नागरिकों की गलतफहमियों के बारे में सच्चाई स्पष्ट की है। साथ ही भारी बारिश के दौरान बिजली की समस्याओं को लेकर जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।

मनोज बारोट के अनुसार, BJP का काम समस्या को स्वीकार करना और उसका समाधान तलाशना है। इसी भूमिका के तहत BJP के कॉर्पोरेटर बिजली उपभोक्ताओं और महावितरण अधिकारियों के साथ समन्वय कर अपने-अपने वार्ड में शिकायत निवारण शिविर लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसी तरह महावितरण को भी वसई-विरार में विभाग के अनुसार शिकायत निवारण शिविर आयोजित करने चाहिए, ताकि बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जा सके।

मनोज बारोट ने कहा कि वसई-विरार में बिजली की समस्याओं को केवल महावितरण की समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता। शहर में बिना योजना के हो रहा विकास, बड़े पैमाने पर निर्माण, बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव और नियोजन की कमी बिजली वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर, बढ़े हुए बिजली बिल और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान को लेकर कार्रवाई की मांग के बीच BJP ने महावितरण प्रशासन के खिलाफ मार्च की तैयारी का संकेत दिया है। इससे वसई-विरार में बिजली आपूर्ति और वितरण व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।

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