मुंबई में पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाली बीएमसी की महत्वाकांक्षी योजना गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के चौथे चरण के निर्माण कार्य की अब तकनीकी और गुणवत्ता के स्तर पर कड़ी निगरानी होगी। बीएमसी प्रशासन ने इस परियोजना के तहत बन रहे फ्लाईओवर और सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान यानी वीजेटीआई को सौंपी है।

बीएमसी ने वीजेटीआई को तीसरे पक्ष के तकनीकी निरीक्षण और गुणवत्ता निगरानी के लिए नियुक्त किया है। संस्थान के विशेषज्ञ निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करेंगे और परियोजना की गुणवत्ता को लेकर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

जीएमएलआर प्रोजेक्ट के चौथे चरण के तहत मुलुंड में ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ऐरोली टोल नाके के बीच कई महत्वपूर्ण फ्लाईओवर और लिंक रोड बनाए जा रहे हैं। करीब 1,354 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 1,330 मीटर लंबा केबल से बना फ्लाईओवर भी शामिल है। इसके साथ ही यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंटरचेंज का निर्माण किया जा रहा है।

परियोजना के बड़े और जटिल निर्माण कार्यों की मजबूती और गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनी रहे, इसके लिए वीजेटीआई के विशेषज्ञ पूरे निर्माण कार्य पर निगरानी रखेंगे। संस्थान तकनीकी स्तर पर निर्माण की जांच के साथ इसकी रिपोर्ट भी तैयार करेगा।

महाराष्ट्र सरकार के नियमों के अनुसार किसी प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान से ऑडिट कराना अनिवार्य होता है। इसी प्रक्रिया के तहत वीजेटीआई अगले 36 महीनों तक जीएमएलआर के चौथे चरण के निर्माण कार्य की लगातार जांच करेगी। इसका उद्देश्य सड़क और पुल निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की गुंजाइश को रोकना है।

बीएमसी अधिकारियों को उम्मीद है कि इस कड़े तकनीकी निरीक्षण से गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड का निर्माण सुरक्षित और टिकाऊ मानकों के अनुरूप होगा। परियोजना पूरी होने के बाद इससे मुंबईकरों को यातायात में बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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