मुंबई। मुंबई जैसे बड़े और समृद्ध शहर में बच्चों का कुपोषित होना बेहद चिंताजनक है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को बीएमसी मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुंबई में बच्चों के कुपोषण और सरकारी कामकाज में सुधार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कंपनियों से सीएसआर फंड के जरिए गरीब बस्तियों में बच्चों के खान-पान और सेहत को बेहतर बनाने के लिए आगे आने की अपील की।

फडणवीस ने कहा कि मुंबई में भोजन की भारी कमी नहीं है, लेकिन झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब परिवारों के बच्चों को सही पोषण नहीं मिलने से उनका विकास रुक जाता है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए कंपनियों से अपने सीएसआर फंड का इस्तेमाल करने और गरीब बस्तियों में बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए काम करने का आह्वान किया।

इसी कार्यक्रम में उन्होंने बीएमसी के नए ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंच केवल कंपनियों से पैसे जमा करने का जरिया नहीं है, बल्कि बीएमसी, सामाजिक संस्थाओं और कंपनियों को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी और पोषण जैसे क्षेत्रों में सीधे काम करने में मदद करेगा।

फडणवीस ने कहा कि किसी काम में कितना पैसा खर्च हुआ, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस खर्च से आम जनता के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया। उन्होंने बीएमसी को अपनी पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करने और नई तकनीक अपनाने की भी सलाह दी।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को अब हर सेवा बहुत तेजी से चाहिए। फडणवीस ने बिल्डिंग प्लान पास करने जैसी प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल का सुझाव दिया और कहा कि इन प्रक्रियाओं में इंसानी दखल पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, महापौर रितू तावड़े, उपमहापौर संजय घाडी और कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। फडणवीस के संदेश में बीएमसी के कामकाज में तकनीकी बदलाव के साथ-साथ शहर के गरीब और कुपोषित बच्चों के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी पहलों को प्रभावी बनाने पर जोर रहा।

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