मुंबई महानगरपालिका की सुधार समिति द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर किए गए एक प्रस्ताव को मनपा सभागृह में अचानक स्थगित किए जाने से सत्ताधारी शिवसेना और भाजपा के बीच की अंदरूनी खींचतान सामने आ गई है। इस घटनाक्रम पर सुधार समिति की अध्यक्षा संध्या विपुल दोशी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बिना पूर्व सूचना प्रस्ताव स्थगित किए जाने को सुधार समिति के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।

मामला 18 अगस्त को हुई सुधार समिति की बैठक से जुड़ा है। बैठक में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के माध्यम से बीएमसी की विकास नीतियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। आरोप है कि भाजपा इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थी। इसके बाद प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए मनपा सभागृह में लाया गया, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के इसे अचानक स्थगित कर दिया गया।

प्रस्ताव स्थगित किए जाने के बाद सुधार समिति की अध्यक्षा संध्या विपुल दोशी ने महापौर और सभागृह नेता से बात करने का प्रयास किया। हालांकि, उनकी अपील को अनदेखा करते हुए सभागृह में अगला विषय शुरू कर दिया गया। दोशी ने इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए मामले की शिकायत गटनेताओं तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से की है।

उन्होंने बिना पूर्व सूचना प्रस्ताव को स्थगित किए जाने को सुधार समिति के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। इस घटनाक्रम ने मनपा में सत्ताधारी शिवसेना और भाजपा के बीच मतभेद को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।

वहीं, इस विवाद पर सफाई देते हुए सभागृह नेता गणेश खणकर ने कहा कि सभागृह में ऐसा गलती से हुआ हो सकता है। उन्होंने कहा कि वे शिवसेना गटनेता से बात करके इस मसले का समाधान निकाल लेंगे।

सुधार समिति जैसे महत्वपूर्ण मंच से सर्वसम्मति से मंजूर प्रस्ताव को सभागृह में इस तरह रोके जाने से शिवसेना और भाजपा के बीच तनाव बढ़ गया है। इस घटनाक्रम का असर आगामी मनपा की राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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