महाराष्ट्र के 10 शहरों से हटेंगे कचरे के पहाड़, बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट के लिए 52.31 करोड़ रुपये मंजूर
महाराष्ट्र सरकार ने 'स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान 2.0' के तहत 10 शहरों में जमा 9.51 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे के वैज्ञानिक निपटारे के लिए 52.31 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। जानिए किन शहरों में बायोमाइनिंग होगी, कितना बजट मिला और प्रशासन को क्या निर्देश दिए गए हैं।
तस्वीर में एक जेसीबी मशीन और ट्रक कचरे के बड़े ढेर के बीच मलबा हटाते हुए नजर आ रहे हैं।
मुंबई। महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में वर्षों से जमा होकर पहाड़ का रूप ले चुके पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से पूरी तरह समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 'स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान 2.0' के अंतर्गत शुरू किए गए 'डंपसाइट रिमेडिएशन एक्सीलेटर प्रोग्राम' के तहत राज्य की 10 स्थानीय नागरिक निकायों में जमा लगभग 9 लाख 51 हजार 150 मीट्रिक टन कचरे पर 'बायोमाइनिंग' प्रक्रिया चलाई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए नगर विकास विभाग ने 52 करोड़ 31 लाख 82 हजार 500 रुपये के बजट को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
सरकार का उद्देश्य शहरों को पूरी तरह कचरा मुक्त बनाना और डंपिंग ग्राउंड की मूल्यवान जमीन को खाली कर उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। इस परियोजना की कुल लागत 52.31 करोड़ रुपये है, जिसमें 14.79 करोड़ रुपये केंद्र सरकार, 19.10 करोड़ रुपये राज्य सरकार और शेष 18.41 करोड़ रुपये संबंधित नगर निगमों एवं नगर परिषदों द्वारा वहन किए जाएंगे।
जारी आदेश के अनुसार सभी संबंधित नगर निकायों को अगले 15 दिनों के भीतर इस कार्य के लिए ई-निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्य शुरू होने से पहले और पूरा होने के बाद संबंधित स्थलों के जीपीएस फोटो तथा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही योजना की मासिक प्रगति रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी और कार्य समय पर पूरा कराने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नगर निगम आयुक्तों तथा मुख्य अधिकारियों को सौंपी गई है।
जारी आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत सबसे अधिक कचरे का निपटारा ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र में किया जाएगा, जहां 4.25 लाख मीट्रिक टन कचरे के प्रसंस्करण के लिए 23.42 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके बाद भिवंडी-निजामपुर में 2.60 लाख मीट्रिक टन कचरे के लिए 14.30 करोड़ रुपये, नांदेड़-वाघाला में 76 हजार मीट्रिक टन के लिए 4.18 करोड़ रुपये, पिंपरी-चिंचवाड़ में 75 हजार मीट्रिक टन के लिए 4.13 करोड़ रुपये तथा वसई-विरार में 57 हजार मीट्रिक टन कचरे के प्रसंस्करण के लिए 3.14 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, मीरा-भायंदर, मनमाड और ओझर नगर परिषदों में भी इस योजना के तहत निधि आवंटित कर पुराने कचरे के निपटारे का कार्य किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से इन शहरों के लाखों निवासियों को बदबू, बीमारियों और प्रदूषण से राहत मिलने के साथ डंपिंग ग्राउंड की भूमि के बेहतर उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त होगा।