चेम्बूर तेरापंथ भवन में नौ दिवसीय नवधा भक्ति प्रशिक्षण, साध्वी निर्वाणश्री ने बताए आराधना के मंत्र
मुंबई के चेम्बूर तेरापंथ भवन में नौ दिवसीय नवधा भक्ति प्रशिक्षण के दौरान साध्वी निर्वाणश्री और साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने नवरात्रि आराधना, मंत्र साधना, जप, तप और ध्यान का मार्गदर्शन दिया। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालु शामिल हुए।
मुंबई के चेम्बूर तेरापंथ भवन में आयोजित नौ दिवसीय नवधा भक्ति साधना कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करतीं साध्वीश्री और उपस्थित जनसमूह।
मुंबई। चेम्बूर तेरापंथ भवन में नौ दिनों तक चले नवधा भक्ति प्रशिक्षण एवं आराधना कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने जप, तप और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से भाग लिया। आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य और प्रबुद्ध साध्वी योगक्षेमप्रभा के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, मंत्रों और साधना पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया।
भक्ति और उल्लास से सराबोर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि नवरात्रि का समय शक्ति संचय का अवसर है। द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की शुद्धि के साथ की गई आराधना शीघ्र फलदायी होती है। उन्होंने केंद्र द्वारा निर्देशित प्रतिदिन के जप का अनुष्ठान संपन्न करवाया और विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया। साध्वी ने प्रतिदिन नए प्रयोग करवाते हुए अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रों की जानकारी भी दी।
मुख्य प्रवक्ता साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने संबोधन में आध्यात्मिक जागरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब मंत्रों की मधुर ध्वनि चित्त को तरंगित करती है, तब भीतर चैतसिक ऊर्जा का प्रवाह शुरू हो जाता है। भक्ति की तान चेतना के तारों को झंकृत करती है। आधि, व्याधि और उपाधि के उपचार की चाबी स्वयं के पास है। ध्यान, जप और तप के साथ आराधना करने पर समाधि स्वतः प्रकट होती है।
साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने लोगस्स कल्प, नवपद आराधना, नमोत्थुणं साधना, पैंसठिया छंद और नवग्रह शांति सहित विभिन्न विषयों पर सारगर्भित प्रस्तुति दी। उनकी विस्तृत व्याख्या से उपस्थित श्रद्धालुओं को इन साधना पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन मिला।
कार्यक्रम में साध्वी लावण्यप्रभा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी मुदितयशा और साध्वी मधुरप्रभा ने क्रमशः नवकार पाठ, आचार्य स्तुति, स्तोत्र और विभिन्न गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। रात्रि में उवसग्गहरं स्तोत्र और प्रेक्षा ध्यान का क्रम चला।
प्रातः 8.55 बजे से 10.25 बजे तक चले अनुष्ठान में चेम्बूर के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर लाभ लिया। इसके साथ ही घाटकोपर, विक्रोली, कुर्ला, गोवंडी, साकीनाका, मानखुर्द, पवई और सायन कोलीवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों से भी श्रद्धालु उपस्थित रहे। नौ दिवसीय आयोजन में जप, तप, ध्यान और मंत्र साधना के जरिए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया।