विरार-अलीबाग कॉरिडोर के मुआवजे में करोड़ों की ठगी की कोशिश, 4 आरोपियों पर FIR
वसई-विरार क्षेत्र में हाईवे मुआवजे के लिए फर्जी दस्तावेजों से अवैध निर्माण कराने वाले 4 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर हिरासत में लिया।
वसई-विरार में विरार-अलीबाग कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित भूमि पर फर्जी दस्तावेजों और हाउस टैक्स रिकॉर्ड के जरिए सरकारी मुआवजा हड़पने के लिए बनाए गए अवैध कमरे।
वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय राजमार्ग कॉरिडोर योजना के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के मुआवजे में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। राजस्व विभाग ने अवैध निर्माण और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी मुआवजा हड़पने की कथित साजिश का पर्दाफाश किया है। विभाग की शिकायत पर नायगांव पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर वसई न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय राजमार्ग कॉरिडोर का शिलान्यास किया गया था। वर्ष 2022 और 2023 के बीच इस राजमार्ग कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना था। इस परियोजना के लिए उपलब्ध जमीन और अधिग्रहण से संबंधित जानकारी क्षेत्रीय जमीन मालिकों और भू-माफियाओं ने प्राप्त की थी। आरोप है कि इसी जानकारी के आधार पर सरकारी मुआवजे का लाभ लेने के उद्देश्य से अवैध निर्माण और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की योजना बनाई गई।
जांच के अनुसार, आरोपियों ने विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय राजमार्ग कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के संबंध में जानकारी मिलने के बाद मौजे मोरी के सर्वे नंबर 13/2, 13/3, 13/1/1, 13/1/2, 34, 16/1/3, 16/2/1, 17/1, 17/2/2, 35, 29/3 और 32/1 में बिना अनुमति निर्माण कराया। यहां 10 x 10 लंबाई और चौड़ाई वाले बॉक्सनुमा कमरे बनाए गए, जिनमें केवल ढांचे तैयार किए गए थे। इन अवैध निर्माणों को वैध दिखाने के लिए आवश्यक सरकारी दस्तावेजों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए।
आरोप है कि जमीन मालिकों और चॉल बिल्डरों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुल 2,00,000 वर्ग फुट का पक्का निर्माण किया गया। इसके बाद इन दस्तावेजों का इस्तेमाल ग्राम पंचायत पोमन में हाउस टैक्स लगाने के लिए किया गया। शिकायत के मुताबिक, संबंधित लोगों को दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी थी, इसके बावजूद कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए सरकारी मुआवजा प्राप्त करने के इरादे से अवैध निर्माण कराया गया।
राजस्व विभाग की जांच में यह मामला सामने आने के बाद अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित भूमि के बदले मिलने वाले सरकारी मुआवजे को कथित रूप से हड़पने की कोशिश का खुलासा हुआ। इस मामले में क्षेत्रीय तलाठी की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। साथ ही महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 52, 53 और 54 के तहत भी कार्रवाई का आधार बनाया गया। इसके बाद नायगांव पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस इंस्पेक्टर संजय हजारे की ओर से दर्ज मामले में अमित माताप्रसाद मिश्रा, प्रकाश चंद्र अमरनाथ शुक्ला, जगनारायण बालकरण गुप्ता और राजकुमार मोतीलाल यादव को आरोपी बनाया गया है। चारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत धारा 420, 465, 467, 468, 471, 474 और 120(b) में मामला दर्ज किया गया। दर्ज मामले के अनुसार, पुलिस ने चारों आरोपियों को नालासोपारा, बोरीवली और मीरारोड से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को वसई न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मामले की आगे की जांच पुलिस इंस्पेक्टर अनिल मोरे कर रहे हैं। विरार-अलीबाग कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित भूमि पर कथित फर्जी दस्तावेजों और अवैध निर्माण के जरिए मुआवजा हासिल करने का यह मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है।