जरांगे की भाषा पर भुजबळ भड़के, बोले- ‘समझाकर-समझाकर अब सब थक चुके हैं’
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तस्वीर में मंत्री छगन भुजबळ एक कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए नजर आ रहे हैं।
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मनोज जरांगे पाटील और महाराष्ट्र सरकार के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। इसी बीच मंत्री छगन भुजबळ ने जरांगे पाटील के बयानों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी भाषा को लेकर बार-बार समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन अब ‘सांगून सांगून सगळे थकले’ यानी समझाकर-समझाकर सब थक चुके हैं।
छगन भुजबळ ने कहा कि जरांगे पाटील कई लोगों पर लगातार टिप्पणी कर रहे हैं और उनके बोलने के तरीके को लेकर पहले भी समझ देने की कोशिश की गई है। उन्होंने चिंता जताई कि जरांगे पाटील के बयानों का सामाजिक माहौल पर असर पड़ सकता है। भुजबळ के मुताबिक आंदोलन करते समय और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका रखते हुए भाषा का ध्यान रखना जरूरी है।
इस बीच मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का अंतरवाली सराटी में आंदोलन जारी है। आंदोलन की पृष्ठभूमि में सरकार की ओर से चर्चा के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जरांगे पाटील की आक्रामक भूमिका के कारण सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
भुजबळ इससे पहले भी जरांगे पाटील के आंदोलन के तरीके और उनके बयानों पर नाराजगी जता चुके हैं। सरकार में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ-साथ अधिकारियों को लेकर भी जरांगे द्वारा कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की गई थी।
भुजबळ ने यह भी कहा कि मौजूदा जरांगे आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से चर्चा के लिए गई महिला अधिकारी के साथ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है।
मराठा आरक्षण का मुद्दा चर्चा में रहने के साथ ही ओबीसी आरक्षण को लेकर भी छगन भुजबळ और मनोज जरांगे पाटील के बीच राजनीतिक संघर्ष लगातार सामने आता रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों की ओर से आने वाले बयानों पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नजर बनी हुई है।