तस्वीर में कागल शहर में मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर फ्लाईओवर के निर्माण स्थल का निरीक्षण करते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ और अन्य अधिकारी नजर आ रहे हैं।

मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर कागल शहर से गुजरने वाले पिलर वाले फ्लाईओवर का निर्माण जल्द शुरू होगा। 295 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस एक किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर में 50 पिलर होंगे। इसके निर्माण का भूमिपूजन समारोह चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ के हाथों उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मुश्रीफ ने विश्वास जताया कि यह पुल देश का सबसे सुंदर पुल बनेगा।

मंत्री हसन मुश्रीफ ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर कागल शहर से गुजरने वाले मार्ग पर भराव वाले सुरंग के बजाय पिलर वाला फ्लाईओवर बनाने की मांग उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से की थी। गडकरी ने इस मांग को तत्काल मंजूरी दी और निविदा प्रक्रिया पूरी की। मुश्रीफ ने इसके लिए नितिन गडकरी का आभार जताया।

फ्लाईओवर को अगले डेढ़ वर्ष में पूरा करने की योजना है। इससे पहले काम संभालने वाले ठेकेदारों द्वारा काम छोड़ दिए जाने के कारण परियोजना में देरी हुई। हालांकि, अब नए ठेकेदार धारीवाल की कंपनी द्वारा काम की गति अच्छी होने की जानकारी मुश्रीफ ने दी।

मुश्रीफ ने ठेकेदारों को निर्देश दिए कि पुल का पूरा आराखड़ा कागल शहर की सीमा के भीतर होने के कारण निर्माण कार्य के दौरान नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने यूटिलिटी शिफ्टिंग के काम भी सावधानी और योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कागल नगरपालिका और स्थानीय नागरिक विकास कार्यों में सहयोग करेंगे।

इस अवसर पर राष्ट्रीय राजमार्ग कार्रवाई समिति के अध्यक्ष तथा केडीसीसी बैंक के निदेशक प्रताप उर्फ भैय्या माने, नगराध्यक्षा सविता माने, चंद्रकांत गवळी, प्रवीण काळबर, अमित पिष्टे, विवेक लोटे, नवाज मुश्रीफ, बबलू सागवान, विवेक सोनीजी, संदीप सहित अन्य उपस्थित थे।

पिलर वाले फ्लाईओवर से कागल शहर में यातायात जाम की समस्या कम होने में बड़ी मदद मिलेगी। नए बस अड्डे के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। राजमार्ग के किनारे रहने वाले नागरिकों, ठेला चालकों, फल विक्रेताओं, चाय की दुकानों और छोटे कारोबारियों को विस्थापित होने से बचाया जा सकेगा।

कर्नाटक से आने वाले वाहनों के साथ ही राजमार्ग के दोनों ओर स्थित खेतों से कागल के चीनी कारखानों तक होने वाला गन्ना परिवहन भी सुचारु होने में मदद मिलेगी। स्थानीय बस, रिक्शा और वडाप परिवहन अधिक सुचारु होगा तथा दुर्घटनाओं की संख्या कम करने में भी यह परियोजना सहायक होगी।


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