ड्रोन तकनीक से ऊस पर सूक्ष्म अन्नद्रव्य का छिड़काव, कोगील बुद्रुक में प्रात्यक्षिक
सेवा संकल्प अभियान के तहत 1 एकड़ क्षेत्र में 5 मिनट में छिड़काव कर किसानों को आधुनिक कृषि यांत्रिकीकरण की कार्यक्षमता का प्रदर्शन किया गया।
तस्वीर में कृषि प्रतिनिधि और छात्र गन्ने के खेत के सामने बैनर और ड्रोन के साथ खड़े हैं।
सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘फुले समृद्ध ग्राम’ उपक्रम में कोगील बुद्रुक में शेती यांत्रिकीकरण और आधुनिक ड्रोन तकनीक के माध्यम से ऊस की फसल पर ‘फुले द्रवरूप सूक्ष्म अन्नद्रव्य’ के छिड़काव का प्रात्यक्षिक किया गया। इस दौरान किसानों और उपस्थित लोगों को आधुनिक खेती में ड्रोन तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
प्रात्यक्षिक की शुरुआत में कृषि अभियांत्रिकी विभाग के प्राध्यापक Er. एस. के. जाधव ने शेती यांत्रिकीकरण के महत्व, आधुनिक खेती में ड्रोन तकनीक की जरूरत, इसके विभिन्न उपयोग और फायदों के बारे में मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि ड्रोन के माध्यम से कम समय में बड़े क्षेत्र में फसल पर छिड़काव किया जा सकता है। इससे फवारणी का काम अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
इसके बाद ड्रोन के मालिक प्रवीण पाटील ने ड्रोन के नेविगेशन, GPS प्रणाली, नियंत्रण और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। GPS की मदद से छिड़काव के क्षेत्र का निर्धारण, ड्रोन की योजना और नियंत्रण तथा फवारणी की प्रक्रिया किस तरह संचालित की जाती है, इसका उन्होंने प्रत्यक्ष प्रात्यक्षिक के माध्यम से स्पष्टीकरण किया।
इसके बाद ऊस के एक एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से ‘फुले द्रवरूप सूक्ष्म अन्नद्रव्य’ का प्रत्यक्ष छिड़काव किया गया। खास बात यह रही कि एक एकड़ क्षेत्र की फवारणी महज करीब पांच मिनट में पूरी की गई। इससे उपस्थित लोगों ने प्रत्यक्ष देखा कि पारंपरिक पद्धति की तुलना में ड्रोन तकनीक के जरिए कम समय में फवारणी का काम पूरा किया जा सकता है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के रा.वे. समन्वयक डॉ. बी. टी. कोलगणे, मृदाशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. डी. एस. पोद्दार तथा कृषि अभियांत्रिकी विभाग के प्राध्यापक Er. एस. के. जाधव उपस्थित थे।
कार्यक्रम का प्रस्तावना, संचालन और आभार प्रदर्शन ऋषिका माने ने किया। श्री. संताजी सांगावे ने ड्रोन तकनीक के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। प्रात्यक्षिक के आयोजन में पूजा नाळे, गौरी खाटपे, संध्या पेटकर, प्रांजल मांजरे और प्राजक्ता पाटील ने सहयोग किया।
कोगील बुद्रुक में हुए इस प्रात्यक्षिक में ऊस की फसल पर ड्रोन से ‘फुले द्रवरूप सूक्ष्म अन्नद्रव्य’ की फवारणी कर आधुनिक शेती यांत्रिकीकरण के व्यावहारिक इस्तेमाल को सामने रखा गया। एक एकड़ क्षेत्र में करीब पांच मिनट में फवारणी पूरी होने से उपस्थित किसानों को ड्रोन तकनीक की कार्यक्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।