धोंडगांव में जमुनामाता मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, 62 साल से कायम है आस्था की परंपरा
महाराष्ट्र के वर्धा जिले के धोंडगांव में जमुनामाता मंदिर नवरात्रोत्सव पर श्रद्धालुओं से गुलजार है। करीब 62 साल पुरानी इस आस्था परंपरा, बंडूजी थुटे के योगदान और मंदिर में भक्तों की सेवा की पूरी कहानी जानें।
तस्वीर में महाराष्ट्र के वर्धा जिले के समुद्रपुर तहसील स्थित धोंडगांव में जमुनामाता मंदिर के प्रांगण में नवरात्रोत्सव के अवसर पर दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
महाराष्ट्र के वर्धा जिले के समुद्रपुर तहसील स्थित धोंडगांव में जमुनामाता का प्रसिद्ध मंदिर विदर्भ के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्रोत्सव के दौरान यहां माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उत्सव के पहले दिन से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटने लगी है। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और ग्राम स्वच्छता के लिए ग्रामीण भी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
धोंडगांव गांव हिंगणघाट–उमरेड राज्य राजमार्ग संख्या 258 पर स्थित है। गांव के किसान बंडूजी थुटे के खेत में जमुनामाता का यह मंदिर बना हुआ है। मंदिर के निर्माण से लेकर अब तक इसके विकास में बंडूजी थुटे का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वह मंदिर के निर्माण और विकास कार्यों पर हर साल लाखों रुपये खर्च करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि माता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें आवश्यक सुविधाएं मिलें।
मंदिर में सामान्य दिनों में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि नवरात्रोत्सव के नौ दिनों में दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों भक्त पहुंचते हैं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा रहता है।
मंदिर की स्थापना करीब 62 वर्ष पहले हुई थी। भंडारा जिले के बोडगांव स्थित जमुनामाता मंदिर के प्रति थुटे परिवार की पहले से गहरी श्रद्धा थी। बंडूजी थुटे बचपन में अपने परिवार के साथ बोडगांव मंदिर में दर्शन करने जाते थे। धीरे-धीरे उनके मन में जमुनामाता के प्रति गहरी आस्था विकसित हुई और वह माता के अनन्य भक्त बन गए।
बचपन में बंडूजी की माता के प्रति लगन और भक्ति देखकर उनके परिवार के सदस्यों ने बोडगांव स्थित जमुनामाता से प्रार्थना की। इसके बाद धोंडगांव के पास उनके खेत में एक छोटा मंदिर बनाया गया। शुरुआत में इस मंदिर में केवल थुटे परिवार के सदस्य ही पूजा-अर्चना करते थे।
बंडूजी थुटे का बचपन का अधिकांश समय भी इसी मंदिर में बीतता था। धीरे-धीरे गांव के लोग भी माता के दर्शन के लिए आने लगे। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास बढ़ता गया कि मंदिर में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। समय के साथ मंदिर की ख्याति आसपास के क्षेत्रों में फैलती गई और यहां आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ती गई। आज मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
नवरात्रोत्सव नजदीक आते ही धोंडगांव में भक्तिमय वातावरण बन जाता है। गांव के लोग माता की सेवा में भाग लेते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने और उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण विशेष ध्यान रखते हैं।
बंडूजी थुटे की उम्र अब करीब 67 वर्ष हो चुकी है, लेकिन जमुनामाता के प्रति उनकी श्रद्धा और भक्ति आज भी बचपन जैसी दृढ़ है। उन्होंने अपना जीवन माता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मंदिर में मन से मांगी गई इच्छाएं पूरी होती हैं और माता अपने भक्तों को निराश नहीं करतीं। इसी विश्वास के चलते नवरात्रोत्सव के दौरान यहां पहुंचने वाले भक्तों का थुटे परिवार की ओर से अतिथि की तरह सम्मान किया जाता है। श्रद्धालुओं की सेवा को माता की सेवा मानकर पूरा थुटे परिवार इस कार्य में जुटा रहता है।
मंदिर के निर्माण से लेकर इसके वर्तमान स्वरूप तक के विकास कार्यों में बंडूजी थुटे ने अपनी खेती से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा खर्च किया है। उनकी इच्छा है कि मंदिर की इमारत मजबूत बने, लंबे समय तक टिकाऊ रहे और यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को शांति और संतोष का अनुभव हो।
वर्तमान में मंदिर की सुरक्षा और दैनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी बंडूजी थुटे के पुत्र सचिन थुटे संभाल रहे हैं। वह मंदिर से जुड़े विभिन्न कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रबंधन के लिए नियमित रूप से सक्रिय रहते हैं।
नवरात्रोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। इसके साथ ही गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए ग्रामीण भी पहल कर रहे हैं। प्रतिदिन सुबह हाथों में झाड़ू लेकर गांव की सफाई की जाती है। इस तरह धार्मिक आयोजन के साथ स्वच्छता का संदेश भी दिया जा रहा है।
नवरात्रोत्सव के पहले दिन सुबह से ही जमुनामाता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए भक्त माता के चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद ले रहे हैं। धोंडगांव स्थित जमुनामाता मंदिर में श्रद्धा, भक्ति, सेवा और विश्वास का संगम दिखाई दे रहा है।
करीब 62 वर्ष पहले बंडूजी थुटे की भक्ति से शुरू हुई मंदिर की परंपरा आज भी लगातार जारी है। जमुनामाता का यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र बन चुका है। थुटे परिवार और ग्रामीणों के निरंतर प्रयासों से यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है।