फसल बीमा मुआवजा न मिलने से किसानों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
फसल कटाई प्रयोग को एकमात्र मानदंड बनाए जाने से खरीफ और रबी सीजन के अधिकांश किसान मुआवजे से वंचित, पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग।
इस वर्ष हुई अतिवृष्टि और बेमौसम बारिश के कारण खरीफ सीजन की फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों ने खरीफ फसल बीमा भी कराया था, लेकिन मुआवजे के लिए केवल फसल कटाई प्रयोग को ही एकमात्र आधार बनाए जाने के कारण अतिवृष्टि, बाढ़ और रोगों से व्यापक नुकसान झेलने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान आज भी एक रुपये के भी बीमा मुआवजे से वंचित हैं। इसे लेकर किसानों में बीमा कंपनी के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
इस बीच, फर्जी आवेदनों, तकनीकी समस्याओं तथा किसानों की तुलना में फसल बीमा कंपनियों को अधिक लाभ मिलने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद राज्य सरकार ने किसानों की केवल एक रुपये की सहभागिता वाली पूर्व फसल बीमा योजना समाप्त कर दी। इसके बाद नुकसान के आकलन के लिए तालुका अथवा मंडल स्तर पर किए जाने वाले फसल कटाई प्रयोग को ही एकमात्र मानदंड बनाया गया, जिसके चलते मौसम, वास्तविक नुकसान के पंचनामे तथा किसानों की शिकायतों को द्वितीयक स्थान मिला।
पिछले खरीफ सीजन में सोयाबीन, कपास और तुअर सहित विभिन्न फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। खेतों में वास्तविक क्षति स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद फसल कटाई प्रयोगों में सामान्य उत्पादन दर्ज किए जाने से अनेक किसान मुआवजे से वंचित रह गए। परिणामस्वरूप शत-प्रतिशत मुआवजा देने संबंधी शासन के आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह गए। किसानों की ओर से अब लगातार मांग की जा रही है कि पुरानी फसल बीमा योजना की तरह मौसम आधारित मानदंड, वास्तविक नुकसान के पंचनामे तथा प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।
नई योजना में स्थानीय आपदा संबंधी ट्रिगर समाप्त किए जाने से किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। दूसरी ओर, केवल फसल कटाई प्रयोग को आधार बनाए जाने के कारण वास्तविक नुकसान होने के बावजूद किसानों को फसल बीमा मुआवजे से वंचित रहना पड़ रहा है।
पिछले वर्ष खरीफ और रबी दोनों सीजन में राज्य सरकार द्वारा एक रुपये वाली फसल बीमा योजना बंद किए जाने के बाद किसानों ने अपनी जेब से राशि खर्च कर फसलों का बीमा कराया था। इसके बावजूद खरीफ और रबी दोनों मौसमों में विभिन्न कारणों से अधिकांश फसलों को नुकसान होने पर भी अत्यंत सीमित किसानों को छोड़कर किसी को भी इस वर्ष बीमा मुआवजा नहीं मिला। किसानों का कहना है कि उनके इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने ठोस आवाज नहीं उठाई है, जिससे किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
इस संबंध में ग्राम संघर्ष संघटना के भूषण माधव बाबुल ने कहा कि प्राकृतिक आपदा आने के बावजूद सरकार ने मुआवजे के लिए केवल फसल कटाई प्रयोग को ही आधार बनाया है। इसके कारण कटाई से पहले फसल नष्ट होने पर भी किसानों को कोई राहत नहीं मिलती। उनका कहना है कि फसल कटाई प्रयोग का वर्तमान मानदंड किसानों के साथ अन्याय कर रहा है। उन्होंने मांग की कि पिछले खरीफ और रबी सीजन का फसल बीमा सभी किसानों को बिना भेदभाव के दिया जाए, अन्यथा इस मुद्दे को लेकर किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।