तस्वीर में छत्रपति संभाजीनगर के धाराशिव उपकेंद्र में अभिनय कला संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथि, शिक्षक और विद्यार्थी नजर आ रहे हैं।

छत्रपति संभाजीनगर। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के धाराशिव उपकेंद्र के नाट्यशास्त्र एवं लोककला विभाग की ओर से रविवार, 4 अक्टूबर को ‘अभिनय कला’ संवाद कार्यक्रम के तहत विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रदर्शनकारी कला विभाग के वरिष्ठ सहायक तथा प्रसिद्ध नाट्य शिक्षक, प्रशिक्षक, नाटककार एवं निर्देशक डॉ. सतीश पावडे ने अभिनय प्रशिक्षण में सिद्धांत और व्यवहार के समन्वय को आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुए डॉ. सतीश पावडे ने कहा कि अभिनय प्रशिक्षण के व्यवहार में सिद्धांत और सैद्धांतिक अध्ययन में व्यवहार का समन्वय होना आवश्यक है। इस समन्वय से अभिनय का शिक्षण और प्रशिक्षण प्रभावी रूप से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शक्ति, ऊर्जा और चेतना अभिनय की प्रारंभिक आवश्यकता है। इसी आधार पर अभिनय का कौशल विकसित होता है। अभिनय का शिक्षण प्राप्त करने के लिए कलाकार को त्रिसूत्री समझना भी आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय नाट्यशास्त्र में अभिनय के विभिन्न प्रकारों के साथ उनके सिद्धांत और व्यावहारिक उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया। भारतीय नाट्यशास्त्र में अभिनय के चार प्रकार आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्त्विक तथा चित्राभिनय के सिद्धांत और व्यवहार को समझना भी अत्यंत आवश्यक बताया गया।

कार्यक्रम में डॉ. पानडे का स्वागत एवं सत्कार केंद्र के संचालक प्रा. डॉ. रमेश चौगुले ने किया। व्याख्यान आयोजित करने के लिए नाट्यशास्त्र एवं लोककला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. महेश्वर कळलावे ने मार्गदर्शन किया। प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक डॉ. प्रा. उषा कांबळे ने आभार व्यक्त किए।

इस अवसर पर डॉ. अमोल पानडे द्वारा लिखित एवं प्रा. कैलास पुप्पलवाड द्वारा निर्देशित ‘कृष्णगाथा’ एकांकी नाटक का विभाग के विद्यार्थियों द्वारा मंचन किया गया।

डॉ. उषा कांबळे ने नियोजन के साथ प्रस्तावना करते हुए डॉ. सतीश पावडे का स्वागत किया। उनके मार्गदर्शन में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलगुरू के मार्गदर्शन में उपकेंद्र में नए-नए उपक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कार्यक्रम में सचिन शिंदे, समाधान खंडागळे, अविनाश शिंदे, सुमेध चिलवंत, प्रकाश मुंडे, सुमित उनाळी, साक्षी गायवकाड, प्राजक्ता रेणेके, आकांक्षा सोलंके आदि उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अभिनय के सैद्धांतिक अध्ययन के साथ उसके व्यावहारिक पक्ष को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के आयोजन ने नाट्यशास्त्र एवं लोककला विभाग में अभिनय शिक्षा के सिद्धांत और व्यवहार के समन्वय को केंद्र में रखा।

प्रा. रुपेश ठाकूर

प्रतिनिधी, छत्रपती संभाजीनगर

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