डिंडोरी में वायरल विभागीय मैसेज से मचा बवाल, स्कूलों में मीडिया प्रवेश रोकने के कथित निर्देश पर उठे बड़े सवाल

डिंडोरी में स्कूलों में मीडिया प्रवेश रोकने के कथित विभागीय मैसेज के वायरल होने से विवाद गहरा गया है। बीईओ सतीश धुर्वे ने आदेश जारी करने से इनकार किया।

Update: 2026-07-31 10:51 GMT

तस्वीर में डिंडोरी स्थित कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी की इमारत और परिसर में खड़े लोग दिखाई दे रहे हैं।

डिंडोरी जिले में पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक कथित विभागीय मैसेज अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। इस मैसेज ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल संदेश में कथित तौर पर समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, बीआरसी और संस्था प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पत्रकार या बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश न करने दिया जाए। इसके साथ ही स्कूलों की फोटो या वीडियो बनाने पर रोक लगाने तथा मीडिया को किसी भी प्रकार की जानकारी या बाइट न देने की बात भी लिखी गई है।

वायरल मैसेज में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि किसी विद्यालय की फोटो, वीडियो या जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्था प्रमुख की होगी। इस कथित निर्देश के सामने आने के बाद जिलेभर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या शिक्षा विभाग में पारदर्शिता से बचने की कोशिश की जा रही है या फिर किसी गड़बड़ी को छिपाने के लिए ऐसा संदेश प्रसारित किया गया।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी अपने स्तर पर इस प्रकार का आदेश जारी नहीं कर सकते। ऐसे निर्देश सामान्यतः वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति या आदेश के बाद ही जारी किए जाते हैं। यही कारण है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह मैसेज किसके निर्देश पर तैयार किया गया और विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप तक कैसे पहुंचा।

हैरानी की बात यह भी है कि पूरे मामले में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। उनकी चुप्पी भी कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है।

वहीं, जब इस वायरल मैसेज को लेकर डिंडोरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी सतीश धुर्वे से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और न ही उन्होंने ऐसा कोई मैसेज वायरल किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पूरे मामले से अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएंगे ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह आदेश असली नहीं है तो इसे वायरल किसने किया और यदि यह किसी विभागीय समूह में साझा हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। फिलहाल पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालों की झड़ी लगा दी है।

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