तस्वीर में कोटा के मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज नजर आ रहे हैं।

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में 'विराग वर्धन वर्षायोग-2026' के अंतर्गत समाधिस्थ गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के सुशिष्य एवं पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ (6 पिच्छी) का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में जारी है। आयोजन अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है, जब उसके विचार, वाणी और व्यवहार में करुणा, संवेदना और आत्मसंयम का समावेश हो। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक धर्म दूसरों के जीवन में खुशियां बांटना है, न कि किसी की पीड़ा का कारण बनना।

उन्होंने कहा, "सबको हंसाना, लेकिन कभी किसी पर हंसना मत। सबके दुःख बांटना, लेकिन किसी को दुःखी मत करना। सबकी राह में दीप जलाना, लेकिन किसी का दिल मत जलाना। यही जीवन की सच्ची रीत है। जैसा बोओगे, वैसा ही पाओगे।"

गणधर मुनि ने कहा कि मनुष्य के प्रत्येक कर्म का फल निश्चित है। जो व्यक्ति प्रेम, दया, सेवा और सद्भाव के बीज बोता है, उसे जीवन में सुख, शांति और सम्मान की प्राप्ति होती है। वहीं ईर्ष्या, अहंकार, कटुता और द्वेष का मार्ग अंततः दुःख और अशांति की ओर ले जाता है। उन्होंने धर्म की शरण को जीवन के सच्चे आनंद का मार्ग बताते हुए परोपकार और प्रेम के बीज बोने का संदेश दिया।

मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं महामंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि दीप प्रज्ज्वलन, चित्र अनावरण एवं पादप्रक्षालन का लाभ सकल दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, मनोज मित्तल, जम्बु बज, पुष्प लुहाड़िया, दीपक पाटनी तथा बाहर से आए गुरु भक्तों को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन पारस कासलीवाल ने किया।

कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पटौदी, सकल समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बडला, ताराचंद बडला, मनोज जैसवाल, महेंद्र बगड़ा, मौसम त्रिपाल, ऋषभ बाकलीवाल, चन्द्रेश रावका, पदम हरसौरा, राजेश सोनी, राज कुमार पाटनी, पुष्प लुहाड़िया, आशीष ठोला, महेंद्र ठाई, वर्धमान खटोड़ सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। चातुर्मास के दौरान आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि विवर्धनसागर जी महाराज ने करुणा, सेवा, परोपकार और आत्मसंयम को जीवन की वास्तविक साधना बताते हुए धर्ममय जीवन अपनाने का संदेश दिया।

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