तस्वीर में बाएं से प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा, संघ के अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ और अतिरिक्त रजिस्ट्रार बीना बैरवा कोटा में बैठक के दौरान नजर आ रहे हैं।

कोटा, 5 अगस्त। कोटा-बूंदी जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की बोर्ड बैठक में पशुपालकों और दुग्ध उत्पादक किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। संघ ने दूध खरीद दर में ₹30 प्रति किलो फैट की वृद्धि करते हुए इसे ₹820 से बढ़ाकर ₹850 प्रति किलो फैट करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से कोटा और बूंदी जिले के हजारों दुग्ध उत्पादक किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा।

सरस सभागार में आयोजित बोर्ड बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने की। बैठक में किसानों एवं दुग्ध उत्पादक सदस्यों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए ‘सरस लाडो मायरा’ योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई। योजना के तहत संघ के सदस्य परिवारों की पुत्रियों के विवाह पर ₹21 हजार की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

डेयरी सहकारिता के विस्तार की दिशा में बोर्ड ने 15 नई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के गठन को मंजूरी दी, जिनमें 7 महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां शामिल हैं। संघ के प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा ने बताया कि महिला समितियों के गठन से ग्रामीण महिलाओं की डेयरी गतिविधियों में भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

बैठक के दौरान अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां बीना बैरवा के सरस डेयरी परिसर पहुंचने पर अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने बताया कि संघ लगातार प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। चालू वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही के अंत तक संघ ने 49.27 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है। इस अवधि में आवश्यक पूंजीगत निवेश भी किए गए हैं, जिससे डेयरी गतिविधियों के विस्तार तथा आधारभूत ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।

बैठक में अतिरिक्त रजिस्ट्रार बीना बैरवा, प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा, राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) के प्रतिनिधि श्रीकांत वैष्णव सहित संचालक मंडल के सदस्य गौरी शंकर, धनराज सैनी, जोधराज मीणा, बनवारी लाल नागर, माया किराड़, हरनाथ मीणा, रामेश्वर, रोशनलाल, रासबिहारी, फोरंता बाई एवं शैतान गुर्जर उपस्थित रहे। बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों को डेयरी सहकारिता के विस्तार, पशुपालकों की आय वृद्धि और सदस्य परिवारों के सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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