वरिष्ठ किसान नेता सुनील गालव का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया, जिसके बाद बारां में उनकी अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए।

वरिष्ठ किसान नेता एवं चम्बल परियोजना समिति सीएडी कोटा के लगातार 15 वर्षों से सर्वसम्मति से सभापति रहे सुनील गालव का दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे पिछले लगभग डेढ़ महीने से सीने में संक्रमण (चेस्ट इंफेक्शन) की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके असामयिक निधन की खबर कोटा, बूंदी और बारां सहित पूरे हाड़ौती अंचल में पहुंचते ही किसान जगत, राजनीतिक गलियारों और आमजन में शोक की लहर दौड़ गई।

सुनील गालव के निधन से चम्बल परियोजना समिति के सदस्यों और सीएडी प्रशासन में भी शोक का माहौल है। मूल रूप से मांगरोल तहसील की भटवाड़ा पंचायत के सींधनिया (सिंनधनिया) गांव के निवासी सुनील गालव पुत्र स्वर्गीय नंदलाल गालव का जीवन किसान हितों और जनसेवा को समर्पित रहा।

अपने मधुर व्यवहार, शालीनता और सहज स्वभाव के कारण वे पूरे क्षेत्र में लोकप्रिय थे। राजनीतिक और सामाजिक जीवन की शुरुआत में वे भटवाड़ा पंचायत के सरपंच रहे। उन्होंने जिला परिषद सदस्य का चुनाव भी लड़ा। इसके बाद विगत 15 वर्षों से वे चम्बल परियोजना समिति के सभापति पद पर निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से चुने जाते रहे। यह उनके कुशल नेतृत्व और सर्वप्रिय व्यक्तित्व का प्रमाण रहा। वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे थे।

वर्तमान में बारां में निवास कर रहे स्व. सुनील गालव का अंतिम संस्कार बारां में ही किया गया। दोपहर में कॉलेज रोड बारां स्थित उनके निवास से मुक्तिधाम के लिए अंतिम यात्रा निकली। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी, किसान और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

अंतिम संस्कार एवं दाह-संस्कार के दौरान उप सभापति धर्मराज गुर्जर, पूर्व उप सभापति अशोक नंदवाना, कुलदीप सिंह गौड़, ब्रजमोहन मालव, रामेश्वर नागर, गिर्राज मालव और बंशीधर मालव सहित क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं एवं हजारों गणमान्य नागरिकों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम विदाई दी। सुनील गालव के निधन से किसान जगत, चम्बल परियोजना समिति, सीएडी प्रशासन और हाड़ौती क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।

Tags: