आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग, समता आंदोलन समिति ने कोटा में किया प्रदर्शन
कोटा में समता आंदोलन समिति ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा समेत क्रीमी लेयर, कोटे में कोटा और एससी-एसटी एक्ट पर ज्ञापन सौंपा।
तस्वीर में समता आंदोलन समिति के पदाधिकारी और सदस्य कोटा में प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने से पहले प्रदर्शन के दौरान नजर आ रहे हैं।
आरक्षण व्यवस्था, एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की मांग को लेकर समता आंदोलन समिति, कोटा की ओर से शुक्रवार को प्रदर्शन किया गया। समिति ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगें रखीं। यह सांकेतिक प्रदर्शन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को आयोजित आरक्षण हटाओ आंदोलन के समर्थन में किया गया। प्रदर्शन में समिति से जुड़े करीब 150 लोग शामिल हुए और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
समता आंदोलन समिति के संभागीय अध्यक्ष अनिल शर्मा के नेतृत्व में एक दल नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हुआ। समिति पदाधिकारियों के अनुसार, दल वहां पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देगा।
समता आंदोलन समिति के जिलाध्यक्ष गोपाल लाल गर्ग, संयोजक राजेंद्र गौतम, शहर अध्यक्ष शकरलाल सिंघल तथा एससी प्रकोष्ठ अध्यक्ष छीतरलाल की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में जातिगत आरक्षण की वर्तमान उपयोगिता, इसके उपयोगिता तथा सामाजिक प्रभाव की व्यापक समीक्षा की मांग की गई। समिति ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था के कारण समाज में जातिगत अलगाव और विद्वेष की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।
संयोजक राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि ज्ञापन में एससी और एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान लागू करने तथा एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण में कोटे के भीतर कोटा लागू करने की मांग की गई है। समिति का कहना है कि इससे आरक्षण का लाभ जरूरतमंद वर्ग तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
समिति ने यूजीसी से संबंधित प्रावधानों को निरस्त करने की मांग भी रखी। ज्ञापन में कहा गया कि छात्र वर्ग में किसी भी प्रकार का अनावश्यक भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत गिरफ्तारी से पहले उचित जांच और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
समता आंदोलन समिति ने ज्ञापन के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था, एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर, कोटे के भीतर कोटा, यूजीसी से जुड़े प्रावधानों तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत गिरफ्तारी की प्रक्रिया से संबंधित अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं।