कोटा के आरटीयू कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर उपलब्धियां साझा की गईं।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी के कार्यकाल का एक वर्ष 23 अक्टूबर को पूरा हो गया। इस दौरान विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं नवाचार, उद्योग-अकादमिक समन्वय और विद्यार्थी-केंद्रित पहलों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। प्रदेश की तकनीकी शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ करने के साथ विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय परिदृश्य में नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए गए।

कोटा स्थित राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल है। प्रो. चौधरी ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, संबद्ध तकनीकी महाविद्यालयों के साथ अकादमिक समन्वय बढ़ाने और बदलते राष्ट्रीय एवं वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप तकनीकी शिक्षा विकसित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और समस्त हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। शुभचिंतकों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।

प्रो. निमित चौधरी ने वर्ष 2025 में कुलगुरु के रूप में कार्यभार संभाला था। कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन और विश्वविद्यालय के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता दी। उनके निर्देशन में तकनीकी शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय कौशल, अनुसंधान, नवाचार और रोजगारोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में पहल की गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, परिणाम आधारित अधिगम, उद्योग सहभागिता और नवाचार आधारित शिक्षण संस्कृति को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों को रोजगारपरक तथा कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रमुखता दी गई। विकास की भावी दिशा में अकादमिक उत्कृष्टता, आधुनिक तकनीकी ज्ञान, अनुसंधान संस्कृति, उद्योगों के साथ सहयोग और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखा गया है। विश्वविद्यालय ने राजस्थान की तकनीकी शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में प्रयास किए हैं।

कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि पिछला एक वर्ष विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयास, विश्वास और नवाचार की यात्रा का वर्ष रहा है। उनका लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर लागू करते हुए राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय को देश के अग्रणी तकनीकी विश्वविद्यालयों की श्रेणी में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित कर रहा है, जिसमें ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग सहयोग का प्रभावी समन्वय हो तथा विद्यार्थी वैश्विक चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय अनुसंधान उत्कृष्टता, स्टार्टअप इकोसिस्टम, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डिजिटल शिक्षा और उद्योग सहभागिता का और विस्तार करेगा। गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान, नवाचार, उद्योग सहयोग और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भविष्य के कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करना विश्वविद्यालय के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय के संचालन में जिस मेहनत, लगन, प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य किया गया है, उसके आधार पर यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आने वाले समय में उच्च शिक्षा का देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनेगा।

प्रो. चौधरी के कार्यकाल के पहले वर्ष में विश्वविद्यालय ने कई शैक्षणिक और प्रशासनिक उपलब्धियां दर्ज कीं। विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति का उसके मूल उद्देश्य और भावना के अनुरूप क्रियान्वयन किया गया। सभी संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का पूर्ण क्रियान्वयन किया गया। करियर प्रोग्रेशन के तहत शिक्षकों के लगभग 200 सीएएस प्रमोशन और पे फिक्सेशन किए गए, जबकि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को कुल 110 प्रमोशन दिए गए।

विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की संख्या पहली बार 8 से बढ़कर 63 हो गई। इस संबंध में वर्तमान में कोई प्रकरण लंबित नहीं है। इसके अतिरिक्त, देश और दुनिया की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप पहली बार आठ नई फैकल्टी स्थापित की गईं। विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रकार की फैकल्टी देश के किसी भी विश्वविद्यालय में पहली बार स्थापित की गई हैं। विश्वविद्यालय में तीन नए प्राणवेद केंद्र, भारत प्रज्ञा केंद्र और अवनी जीवन केंद्र की स्थापना भी की गई। भारतीय ऋषियों एवं महान विभूतियों के नाम पर विश्वविद्यालय के भवनों का नामकरण किया गया।

प्रवेश के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए। विश्वविद्यालय विभाग के इतिहास में पहली बार शत-प्रतिशत प्रवेश हुआ। संघटक महाविद्यालयों में प्रवेश में 25 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बीबीए और बीसीए में प्रवेश दोगुने से अधिक हो गए। विश्वविद्यालय विभाग और संघटक महाविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता प्रदान की गई। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए राजकाज एवं ई-फाइलिंग व्यवस्था अपनाई गई, जिससे फाइलों की ट्रैकिंग को बढ़ावा मिला।

परीक्षा व्यवस्था में पेपरलेस प्रक्रिया का संचालन किया गया और परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए गए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आरजीएचएस के तहत मेडिकल लाभ और लंबित देयकों का भुगतान किया गया। पेंशन रेगुलेशंस को स्वीकृति दी गई तथा पेंशन वितरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

पहले वर्ष की इन पहलों के माध्यम से राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक सुधार, अनुसंधान, नवाचार और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। विश्वविद्यालय का आगामी फोकस राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने, उद्योगों के साथ सार्थक साझेदारी विकसित करने और तकनीकी शिक्षा को राष्ट्रीय एवं वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने पर रहेगा।

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