कोटा में मुनि योगसागर जी का संदेश: सामायिक से आत्मस्वरूप पहचानें, 23 अक्टूबर से स्वास्थ्य शिविर
कोटा में मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने सामायिक, समता भाव और आत्मचिंतन का महत्व बताया। श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र में 23 से 26 अक्टूबर तक स्वास्थ्य जाँच शिविर लगेगा, जिसमें निःशुल्क शुगर जाँच और चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।
कोटा के नसियां जी स्थित श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र में कल्पद्रुम महामंडल विधान के अवसर पर मुनि श्री योगसागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेते श्रद्धालु।
कोटा, 22 अक्टूबर 2026। संसार की संपत्ति, वैभव और बाहरी उपलब्धियां क्षणभंगुर हैं। न कुछ हमारा है, न किसी दूसरे का; यह संसार केवल रैन बसेरा है। आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानकर समता भाव में स्थित होना ही सच्ची साधना है। निर्यापक श्रमण 108 मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा में आयोजित श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के पंचम दिवस पर यह संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने आत्मा और शरीर की भिन्नता, भेद विज्ञान, समता भाव और सामायिक के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। वहीं, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण एवं उपकार दिवस के अवसर पर 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक विशाल स्वास्थ्य जाँच शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें जाँच पर 50 प्रतिशत छूट और निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।
गुरुवार को आश्विन शुक्ल एकादशी, पंचक एवं मुक्तावली व्रत के अवसर पर मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने रत्नकरण्ड श्रावकाचार की प्रवचन श्रृंखला में श्लोक 101 से 104 की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि आत्मा के स्वरूप को समझने और सांसारिक परिस्थितियों में समभाव बनाए रखने से साधक आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
मोह के प्रभाव में बदल जाती है मित्र और शत्रु की पहचान
मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने कहा कि मोह के प्रभाव में मनुष्य की दृष्टि वास्तविकता से दूर हो जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में जो व्यक्ति मित्र दिखाई देता है, वही प्रतिकूल परिस्थितियों में शत्रु लगने लगता है। यह बदलाव वस्तु के वास्तविक स्वरूप में नहीं, बल्कि मनुष्य की दृष्टि और अपेक्षाओं में होता है।
उन्होंने कहा कि साधक को सुख-दुःख, लाभ-हानि, मान-अपमान तथा जीवन-मरण जैसी परिस्थितियों में समभाव बनाए रखना चाहिए। विपरीत परिस्थितियां व्यक्ति की सहनशीलता, धैर्य और आध्यात्मिक साधना की वास्तविक परीक्षा होती हैं। ज्ञानी व्यक्ति शरीर और आत्मा को अलग-अलग समझता है तथा बाहरी परिस्थितियों से विचलित हुए बिना आत्मस्वरूप की ओर उन्मुख रहता है।
समता भाव से संवर और निर्जरा का मार्ग प्रशस्त
मुनि श्री ने कहा कि समता भाव जैन दर्शन की साधना का महत्वपूर्ण आधार है। राग-द्वेष और कषायों के कारण कर्मों का आस्रव होता है, जबकि समता एवं आत्मसंयम के अभ्यास से संवर की दिशा में प्रगति होती है। तप, संयम और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से कर्मनिर्जरा का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य पर-पदार्थों, बाहरी उपलब्धियों और सांसारिक संबंधों में अपनी पहचान खोजता रहेगा, तब तक आत्मानुभूति कठिन बनी रहेगी। साधक को बाहरी विकल्पों से दृष्टि हटाकर अपने भीतर झांकना चाहिए। आत्मचिंतन से राग-द्वेष शांत होते हैं और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
सामायिक केवल धार्मिक क्रिया नहीं, आत्मा में समता स्थापित करने की साधना
सामायिक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने कहा कि इसे करते समय प्रमाद और आलस्य का त्याग कर एकाग्रचित्त होकर शास्त्रोक्त विधि के अनुसार साधना करनी चाहिए। सामायिक का उद्देश्य केवल निश्चित समय तक धार्मिक क्रियाएं करना नहीं, बल्कि मन, वचन और काय को संयमित करते हुए आत्मा में समता भाव स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि सामायिक के दौरान परिग्रह के प्रति ममत्व छोड़ना, कषायों का शमन करना तथा मन-वचन-काय पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। इस अवधि में श्रावक सम्यक भाव से संयम और समता का अभ्यास करता है, तो उसकी साधना मुनि तुल्य भाव की ओर अग्रसर होती है।
श्लोक 103 और 104 की व्याख्या करते हुए मुनि श्री ने कहा कि सामायिक के समय शीत-उष्ण, डांस-मच्छर तथा अन्य शारीरिक और मानसिक प्रतिकूलताओं को धैर्यपूर्वक सहन करना चाहिए। संसार की अशरणता, क्षणभंगुरता और दुःखमय स्वरूप का चिंतन करते हुए साधक को मोक्ष को शाश्वत सुख एवं आत्मकल्याण का मार्ग समझना चाहिए।
धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने किया पुण्यार्जन
श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र में आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक भाग लेकर पुण्यार्जन किया। प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी सम्मान, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यलाभ छोटूलाल, प्रेमलता एवं दीपक धनोत्या परिवार ने प्राप्त किया। कलश स्थापना का पुण्यलाभ कैलाश चंद एवं लाड बाई ठग परिवार ने अर्जित किया।
श्री सुमित सेंकी एवं श्री मनोज बगड़ा ने बताया कि शांतिधारा का पुण्यार्जन श्रीमान राजेन्द्र, हुकम काका एवं प्रकाश हरसोरा परिवार तथा श्रीमती सुशीला बाई, अशोक एवं राजकुमार ठोरा परिवार ने किया।
श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि भक्तामर विधान में श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक भाग लेकर पुण्यार्जन किया। श्री सुनील माडिया के अनुसार, मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का पुण्यलाभ अजय जी को मिला, जबकि मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य श्री धन्नालाल जी, श्री ओमप्रकाश जी एवं डूंगरवाल परिवार को प्राप्त हुआ।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की पूजन-अर्चना की, अर्घ्य समर्पित किए और जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
23 से 26 अक्टूबर तक स्वास्थ्य जाँच शिविर, जाँच पर 50 प्रतिशत छूट
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण एवं उपकार दिवस के अवसर पर श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा में 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक विशाल स्वास्थ्य जाँच शिविर आयोजित किया जाएगा। संत श्री सुधासागर पैथोलॉजी लैब एवं संत श्री सुधासागर आयुर्वेदिक चिकित्सालय की ओर से आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य जाँच पर विशेष छूट और निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। शिविर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा।
शिविर में फुल बॉडी हेल्थ चेक-अप की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा शुगर की जाँच निःशुल्क की जाएगी। जाँच सुविधाओं में विटामिन D, विटामिन B12, हीमोग्राम (CBC with ESR), थायराइड प्रोफाइल, यूरिन जाँच, आयरन स्टडीज, eGFR, ग्लूकोज, लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), लिपिड प्रोफाइल, HbA1c तथा फॉस्फोरस की जाँच शामिल हैं।
विभिन्न स्वास्थ्य जाँच पैकेज भी रियायती दरों पर उपलब्ध रहेंगे। इनमें CBC एवं लिपिड प्रोफाइल, CBC के साथ LFT एवं KFT, विटामिन B12 एवं विटामिन D, टोटल कोलेस्ट्रॉल, TSH, सीरम क्रिएटिनिन, CBC एवं फास्टिंग ग्लूकोज की जाँच शामिल हैं। इसके अलावा ग्लूकोज, सीरम क्रिएटिनिन, CBC with ESR, TSH, बिलीरुबिन, यूरिन जाँच एवं टोटल कोलेस्ट्रॉल सहित निर्धारित जाँचों का पैकेज भी उपलब्ध रहेगा।
आयोजकों के अनुसार, शिविर में आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक एवं एलोपैथिक चिकित्सा सेवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध रहेंगी। स्वास्थ्य जाँच शिविर से संबंधित जानकारी के लिए 8426063147 एवं 9413184122 पर संपर्क किया जा सकता है।
इस आयोजन में श्री दिगम्बर जैन भगवान महावीर संस्थान, कोटा तथा श्री दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा की सहभागिता है। शिविर के निदेशक हुकम जैन ‘काका’ हैं। धार्मिक आयोजन के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की यह पहल 23 अक्टूबर से श्रद्धालुओं और अन्य लोगों के लिए जाँच एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।