कोटा के वैष्णो देवी ज्योति मंदिर में नवरात्रि की धूम, 18 अक्टूबर को 56 भोग और कन्या पूजन
दादाबाड़ी स्थित मंदिर में विशेष अनुष्ठान और आरती आयोजित की जा रही है, जहां महाअष्टमी पर 56 भोग तथा महानवमी को विशाल भंडारा होगा।
कोटा के दादाबाड़ी स्थित वैष्णो देवी ज्योति मंदिर में शारदीय नवरात्रि महोत्सव के दौरान माता रानी की प्रतिमा का किया गया विशेष श्रृंगार।
कोटा। दादाबाड़ी स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी ज्योति मंदिर में शारदीय नवरात्रि महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। महोत्सव के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठानों, सत्संग और भक्ति कार्यक्रमों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना हुआ है। माता रानी का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जा रहा है, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
नवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी लाइटिंग और आकर्षक पुष्प सज्जा से सजाया गया है। प्रतिदिन माता रानी की प्रतिमा का विशेष एवं दिव्य श्रृंगार किया जा रहा है। मंदिर के प्रबंधक सनमीत सिंह बंटी ने बताया कि श्रद्धालुओं की ओर से श्रद्धापूर्वक भेंट की गई नई सुंदर पोशाकों से माता रानी का भव्य श्रृंगार हरप्रीत कौर एवं प्रभरानी कौर द्वारा भक्तिभाव से किया जा रहा है। माता रानी के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं।
मंदिर प्रबंधक सनमीत सिंह ने बताया कि नौ दिवसीय महोत्सव के दौरान मंदिर प्रांगण में निरंतर नवचंडी पाठ और रामायण पाठ के विशेष अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। प्रतिदिन रात ठीक 8:30 बजे भव्य महाआरती आयोजित होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। महाआरती के बाद सभी उपस्थित भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया जाता है।
महोत्सव के अंतर्गत 18 अक्टूबर को महाअष्टमी का पर्व धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुबह 9 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन, कन्या पूजन और महाभोग का अनुष्ठान संपन्न होगा। श्रद्धालु माता रानी को 56 भोग का भव्य प्रसाद अर्पित करेंगे। अष्टमी की आरती के बाद माता रानी के विशेष अलौकिक श्रृंगार को प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया जाएगा।
शारदीय नवरात्रि के नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों का समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के दिन होगा। इस अवसर पर शाम 5 बजे से मंदिर परिसर में विशाल भंडारे यानी महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। इसमें कोटा शहर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर प्रसादी ग्रहण करेंगे। महाअष्टमी पर 56 भोग और कन्या पूजन तथा महानवमी पर विशाल भंडारे के आयोजन के साथ मंदिर में नवरात्रि महोत्सव का समापन होगा।