शिक्षक और स्कूल के विद्यार्थी प्रार्थना मैदान में हाथ आगे बढ़ाकर शपथ लेते हुए।

कोटा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आवासन मंडल केशवपुरा का स्वरूप बदलने और विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब लाने के लिए विद्यालय के शिक्षक प्रकाश जायसवाल ने महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने अपने परिजनों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से विद्यालय के संपूर्ण सौंदर्यीकरण और बहुमुखी विकास का संकल्प लिया है। इस पहल के तहत विद्यालय परिसर को पर्यावरण संरक्षण का आदर्श केंद्र बनाने के साथ विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम, श्रम की गरिमा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के व्यावहारिक संस्कार विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

विद्यालय विकास की इस योजना के तहत छोटे बच्चों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास के लिए आकर्षक बाल वाटिका विकसित की जाएगी। हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के बीच बच्चे खेल-खेल में पर्यावरण के प्रति जागरूक हो सकेंगे। वहीं, स्काउट गाइड गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए परिसर में समर्पित कैंप साइट और 'स्वावलंबन की ठौर' बनाई जाएगी। इनके माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सेवा भाव विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

विद्यालय परिसर को हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक नर्सरी और किचन गार्डन का निर्माण भी किया जाएगा। किचन गार्डन के जरिए विद्यार्थियों को जैविक खेती, मौसमी सब्जियों, औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में परिसर में केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) तैयार करने की व्यवस्था की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को जैविक अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, प्रकाश जायसवाल के परिजनों की स्मृति को समर्पित एक भव्य स्मृति द्वार का निर्माण भी किया जाएगा।

विद्यालय के विकास की यह योजना केवल एक व्यक्ति के प्रयासों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें निजी संसाधनों के साथ सरकारी योजनाओं, समाज के प्रबुद्ध जनों और भामाशाहों के सहयोग को भी जोड़ा जा रहा है। शिक्षक प्रकाश जायसवाल की इस पहल के माध्यम से विद्यालय के सौंदर्यीकरण के साथ विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी व्यावहारिक शिक्षा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। परिजनों की स्मृति को विद्यालय विकास से जोड़ने वाली यह पहल अन्य विद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

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