कोटा दशहरा मेले में 29 अक्टूबर 2026 को आयोजित राजस्थानी कवि सम्मेलन को लेकर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य रामकुमार दाधीच ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने वरिष्ठ गीतकार स्व. दुगार्दान सिंह गौड़ की स्मृति को समर्पित इस कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों के चयन पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि राजस्थानी भाषा के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय और सिफारिशी कवियों को प्राथमिकता दी गई। उनके अनुसार, सम्मेलन में शामिल एक-दो कवियों को छोड़कर अधिकांश का राजस्थानी भाषा से कोई नाता नहीं है।

रामकुमार दाधीच ने कहा कि 45 साल से चली आ रही राजस्थानी भाषा के कवि सम्मेलन की शानदार परंपरा को समाप्त कर केवल राजस्थानी का बैनर लगाकर औपचारिकता पूरी की गई है। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि यह सम्मेलन राजस्थानी भाषा के गीत सम्राट दुगार्दान सिंह गौड़ की स्मृति को समर्पित है, लेकिन इसमें एक भी कवि उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है। दाधीच के अनुसार, नगर निगम को कम से कम इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि दुगार्दान सिंह गौड़ की समकक्ष पीढ़ी के कवियों को आमंत्रित किया जाता।

उन्होंने कहा कि पिछले 45 वर्षों से इस सम्मेलन में देशभर से राजस्थानी भाषा के नामचीन कवियों को आमंत्रित किया जाता रहा है। राष्ट्रीय हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा, विमलेश राजस्थानी तथा गीतकार कल्याण सिंह राजावत और कानदान कल्पित सहित कई दिग्गज कवि यहां काव्यपाठ कर चुके हैं। कोटा दशहरे के राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन की ख्याति पूरे देश में रही है और हाड़ौती के गांव-गांव से हजारों लोग इसे सुनने आते रहे हैं।

दाधीच ने कहा कि हाड़ौती के लोग साल भर अपनी मायड़ भाषा में कवियों के गीत और कविताएं सुनने के लिए दशहरा मेले में आयोजित होने वाले राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन का इंतजार करते हैं। इस बार के आयोजन को लेकर उन्होंने कहा कि आज पूरी हाड़ौती उदास है।

उन्होंने दुगार्दान सिंह गौड़ की समकक्ष पीढ़ी के उन कवियों का भी उल्लेख किया, जिनमें मुकुट मणिराज, विश्वामित्र दाधीच, अम्बिकादत्त चतुर्वेदी, प्रेम शास्त्री, गिरीश विद्रोही नाथद्वारा, कैलाश मंडेला शाहपुरा और राजकुमार बादल भीलवाड़ा शामिल हैं। दाधीच के अनुसार, हाड़ौती के ऐसे प्रसिद्ध कवियों में से एक भी इस सम्मेलन में शामिल नहीं है, जो देशभर में राजस्थानी भाषा में काव्यपाठ करते रहे हैं।

रामकुमार दाधीच ने सवाल उठाया कि दुगार्दान सिंह गौड़ की स्मृति को समर्पित सम्मेलन में उनकी समकक्ष पीढ़ी के प्रतिष्ठित कवियों को स्थान नहीं देना उनकी स्मृति का सम्मान है या अपमान। उन्होंने नगर निगम कोटा की इस मानसिकता की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि 45 साल से स्थापित राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन की परंपरा और ख्याति को ध्यान में रखते हुए आयोजन किया जाना चाहिए था।

Tags: