कोटा में शरद पूर्णिमा पर सजी ‘चाँद, चाँदनी और रात’ की सुरमयी शाम, 100 से अधिक संगीत प्रेमी हुए शामिल
IFRM 3056 और रोटरी क्लब कोटा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं।
कोटा के रोटरी बिनानी सभागार में मंच पर उपस्थित आयोजन समिति के सदस्य और कलाकार।
कोटा में शरद पूर्णिमा के अवसर पर चाँदनी रात और सदाबहार गीतों से सजी ‘चाँद, चाँदनी और रात’ संगीतमय संध्या ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। IFRM 3056 – ‘सुर साथी’ एवं रोटरी क्लब कोटा के संयुक्त तत्वावधान में 27 अक्टूबर को शॉपिंग सेंटर स्थित रोटरी बिनानी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक संगीत प्रेमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में कलाकारों ने चाँद, चाँदनी, रात और प्रेम पर आधारित लोकप्रिय एवं सदाबहार गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। गीतों की धुनों से सजी इस शाम में श्रोताओं ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। संगीत की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
रोटरी क्लब कोटा के अध्यक्ष रोटेरियन लक्ष्मण सिंह खींची ने कहा कि संगीत आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। ऐसे आयोजन लोगों को आपस में जोड़ने और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का सुंदर माध्यम हैं।
IFRM 3056 – सुर साथी की अध्यक्ष वैषाली भार्गव ने कहा कि सुर साथी का उद्देश्य संगीत के माध्यम से लोगों को जोड़ना, मित्रता और सौहार्द बढ़ाना तथा प्रत्येक सदस्य को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर देना है। उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए रोटरी क्लब कोटा, सभी कलाकारों और सहयोगी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रोटरी क्लब कोटा के सचिव रोटेरियन मुकेश चौधरी ने गोविंद महेश्वरी सहित सभी कलाकारों, आयोजकों और उपस्थित संगीत प्रेमियों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के आयोजन में सुर साथी के सचिव विनीत अग्रवाल और क्लब लर्निंग फैसिलिटेटर मुकेश व्यास का विशेष सहयोग रहा।
आयोजन को सफल बनाने में प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स अनिल अग्रवाल, डॉ. शशि अग्रवाल, डॉ. रवि वाया, डॉ. रंजना वाया, हरभजन सिंह माथारू एवं डेज़ी माथारू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कोषाध्यक्ष घनश्याम मूंदड़ा ने बताया कि संगीत और सदाबहार गीतों से सजी यह शाम सभी के लिए यादगार रही। वहीं, प्रवक्ता संजय गोयल ने बताया कि कार्यक्रम में 100 से अधिक सदस्य उपस्थित रहे। शरद पूर्णिमा पर आयोजित इस संगीतमय संध्या में संगीत के माध्यम से आपसी जुड़ाव, मित्रता और सांस्कृतिक सौहार्द को बढ़ावा देने का उद्देश्य सामने आया।