कोटा: सेवानिवृत्त लिपिक ने पत्नी संग जीते-जी किया अपना पिंडदान और श्राद्ध
देहदान का संकल्प ले चुके सत्यप्रकाश गुप्ता और उनकी पत्नी ने कर्मयोगी सेवा संस्थान के कार्यक्रम में स्वयं का तर्पण कर संदेश दिया।
कोटा में कर्मयोगी सेवा संस्थान के 27वें वार्षिक श्राद्ध तर्पण आयोजन में शुक्रवार को एक अनूठा प्रसंग सामने आया। कोटा विकास प्राधिकरण से वरिष्ठ लिपिक पद से सेवानिवृत्त एवं कोटा जिला वैश्य महासम्मेलन के कोषाध्यक्ष सत्यप्रकाश गुप्ता ने अपनी पत्नी मंगला गुप्ता के साथ जीते-जी स्वयं का पिंडदान और श्राद्ध तर्पण संपन्न करवाया। संस्थान की ओर से आयोजित चतुर्दशी का श्राद्ध कोरोना महामारी में दिवंगत हुए लोगों, प्राकृतिक त्रासदियों में जान गंवाने वालों और मानवीय भूलों के कारण मृत अज्ञात लोगों की आत्मशांति को समर्पित रहा।
कर्मयोगी सेवा संस्थान के जिला मुख्यालय रोटेदा रोड स्थित गुरु धाम कॉलोनी में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध विशेष श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। इस दिन देश-दुनिया में कोरोना महामारी से अकाल काल-कवलित हुए दिवंगतों की आत्मशांति के लिए तर्पण किया गया। इसके साथ ही प्राकृतिक त्रासदियों, विशेष रूप से नेपाल में आई हालिया त्रासदी तथा मानवीय भूलों के कारण जान गंवाने वाले अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के लिए भी ईश्वर से प्रार्थना की गई।
संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन 'कर्मयोगी' एवं अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि चतुर्दशी के श्राद्ध के दौरान सत्यप्रकाश गुप्ता और उनकी पत्नी मंगला गुप्ता ने स्वयं का पिंडदान एवं श्राद्ध तर्पण करवाया। गुप्ता दंपती समाज सेवा और राष्ट्र कल्याण के प्रति सदैव समर्पित रहे हैं। दोनों ने 8 दिसंबर 2025 को मेडिकल कॉलेज में देहदान का संकल्प पत्र भरकर इसकी प्रक्रिया पूरी की थी।
जीते-जी पिंडदान करने के अपने निर्णय पर सत्यप्रकाश गुप्ता ने कहा, “हमारे जाने के पश्चात कोई हमारा पिंडदान या श्राद्ध तर्पण करे या न करे, हमें इसकी कोई चिंता नहीं है। हमने अपने जीवन काल में ही स्वयं अपने हाथों से यह धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर लिया है, जिससे अब हम पूरी तरह से निश्चिंत और आत्मसंतुष्ट हैं।” उनका यह कदम आयोजन में उपस्थित जनसमूह के लिए प्रेरणा का केंद्र बना।
संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन 'कर्मयोगी' ने बताया कि 16 दिवसीय श्राद्ध तर्पण महायज्ञ का समापन शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के श्राद्ध के साथ होगा। अमावस्या का श्राद्ध मुख्य रूप से भूले-बिसरे दिवंगतों की आत्मशांति तथा आर्थिक अभाव के कारण जिन परिवारों के श्राद्ध संपन्न नहीं हो पाते, उन सभी पितरों की तृप्ति के लिए समर्पित रहेगा।
शनिवार सायंकाल आम भंडारे और भव्य दीपदान कार्यक्रम के साथ 16 दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन का विधिवत समापन किया जाएगा। इस आयोजन में कोरोना महामारी के दिवंगतों से लेकर प्राकृतिक त्रासदियों में जान गंवाने वाले अज्ञात मृतकों तक की आत्मशांति के लिए तर्पण किया गया, जबकि सर्वपितृ अमावस्या पर उन पितरों को भी समर्पित श्राद्ध होगा, जिनका तर्पण आर्थिक अभाव के कारण नहीं हो पाता।