तस्वीर में पर्युषण पर्व के दौरान प्रवचन देती हुई महिला नजर आ रही हैं।

बालिता रोड स्थित मारवाड़ी श्री पदमप्रभु अग्रवाल दिगम्बर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने प्रातःकालीन अभिषेक, शांतिधारा और 10 लक्षण पर्व की संगीतमय पूजन में भाग लिया। शाम को महाआरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रश्नमंच एवं एक मिनट प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

प्रवचन में बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी ने उत्तम मार्दव धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि मार्दव धर्म अहंकार का त्याग कर विनम्रता और सरलता अपनाने की प्रेरणा देता है। धन, पद, प्रतिष्ठा अथवा ज्ञान का अभिमान मन को अशांत करता है, जबकि विनम्रता से व्यवहार में मधुरता और जीवन में सहजता आती है।

उन्होंने कहा कि दशलक्षण पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि का अवसर है। पर्व के प्रत्येक धर्म को अपने आचरण में उतारने का प्रयास करना चाहिए। अहंकार, क्रोध और द्वेष जैसे विकारों को दूर कर क्षमा, संयम और सद्भाव को जीवन में अपनाना ही पर्व की सार्थकता है।

मंदिर समिति के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी तक अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, आरती सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी के सानिध्य में हो रही संगीतमय पूजा में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

समिति के वरिष्ठ सदस्य बाबूलाल जैन, सीए पारस जैन एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंभू जैन, राजेश जैन, टीकम जैन ने बताया कि पर्व के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक साज-सज्जा के साथ सजाया गया है। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं को अहंकार त्याग, विनम्रता और आत्मशुद्धि का संदेश दिया गया।

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