कोटा के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित विशेष सेमिनार में ईपीएफओ और सोशल सिक्योरिटी रिफॉर्म्स के नए प्रावधानों और कंप्लायंस प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए अधिकारी व उद्योग प्रतिनिधि।

कोटा, 8 अगस्त। एसएसआई एसोसिएशन, कोटा की ओर से शनिवार को कॉन्फ्रेंस हॉल में “ईपीएफओ एवं सोशल सिक्योरिटी रिफॉर्म्स में नवीनतम परिवर्तन” विषय पर विशेष सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान एसएसआई द्वारा प्रकाशित ‘संवाद’ मैगजीन का लोकार्पण भी किया गया। सेमिनार में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों को ईपीएफओ के नवीनतम नियमों, प्रावधानों और कंप्लायंस प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजीत कुमार, एडिशनल सेंट्रल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर रहे। इस अवसर पर सुधीर बत्रा, रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर सहित ईपीएफओ के अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों को बदलती व्यवस्थाओं और नए प्रावधानों से अवगत कराया। एंप्लॉयर्स’ एसोसिएशन के अध्यक्ष वेणु मेहता भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सेमिनार में कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020, ईपीएफ स्कीम 2026, ईपीएस 2026, एडली स्कीम 2026, विश्वास 2026 एवं साइट्स 2.0 सहित ईपीएफओ की नई डिजिटल व्यवस्था और कंप्लायंस प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने सदस्यों की विभिन्न कंप्लायंस संबंधी समस्याओं और प्रश्नों का समाधान भी किया तथा नई व्यवस्थाओं के प्रभावी अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में ईपीएफओ की ओर से आने वाली नई योजनाओं, प्रावधानों एवं सुधारों की जानकारी को ‘संवाद’ मैगजीन के आगामी अंकों के माध्यम से उद्योग जगत तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य सदस्यों को समय पर नई व्यवस्थाओं से अवगत कराना और उनके सही अनुपालन में सहायता करना है।

इस अवसर पर एसएसआई फाउंडर प्रेसिडेंट गोविंदराम मित्तल, रविंद्र कुमार गुप्ता, पास्ट प्रेसिडेंट यशपाल भाटिया, अध्यक्ष दीपक मेहता, सेक्रेटरी समीर सूद एवं ट्रेजर राहुल जैन सहित बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

एसएसआई अध्यक्ष दीपक मेहता ने कहा कि बदलते नियमों के दौर में उद्योगों के लिए सही जानकारी एवं समय पर कंप्लायंस अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “ज्ञान ही सुरक्षा है और सही अनुपालन ही सफल उद्योग की पहचान है।” सेमिनार के माध्यम से ईपीएफओ और सोशल सिक्योरिटी रिफॉर्म्स में हुए नवीनतम बदलावों की जानकारी उद्योग प्रतिनिधियों तक पहुंची, जिससे नई व्यवस्थाओं के समयबद्ध और सही अनुपालन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर रहा।

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