कुरणी बंधारे की मरम्मत पर रोक लगाने की मांग, सात जलप्रवाह मार्ग बंद होने से किसानों को बाढ़ का डर
कोल्हापुर के कुरणी स्थित वेदगंगा नदी के बंधारे की मरम्मत को लेकर किसानों ने सात बंद जलप्रवाह मार्ग खोलने की मांग की है। मुरगूड, निढोरी और वाघापुर में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग को ज्ञापन सौंपा गया।
कोल्हापुर में किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के कागल तालुका स्थित कुरणी में वेदगंगा नदी पर बने बंधारे की मरम्मत को लेकर किसानों ने आक्रामक रुख अपना लिया है। किसानों ने मरम्मत का काम अस्थायी रूप से रोकने और निर्माण के दौरान बंद किए गए दक्षिण दिशा के पांच तथा उत्तर दिशा के दो, कुल सात जलप्रवाह मार्गों को दोबारा खोलने की मांग की है। इस संबंध में कुरणी, मुरगूड, निढोरी, वाघापुर और आसपास के गांवों के किसानों ने कोल्हापुर सिंचाई विभाग दक्षिण के कार्यकारी अभियंता डी. डी. शिंदे को ज्ञापन सौंपा है।
कुरणी स्थित वेदगंगा नदी के बंधारे की मरम्मत का काम फिलहाल जारी है। किसानों का कहना है कि बंधारे के निर्माण के दौरान दक्षिण दिशा के पांच और उत्तर दिशा के दो, इस तरह कुल सात दरवाजों को बंद कर दिया गया था। इन जलप्रवाह मार्गों के बंद होने से बरसात के मौसम में पानी के बहाव और निकासी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों ने ज्ञापन में आशंका जताई है कि इसके चलते मुरगूड, निढोरी, वाघापुर और आसपास के क्षेत्रों में हर साल संभावित भीषण बाढ़ का खतरा बना रहता है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान में बंधारे की मरम्मत का काम चल रहा है और इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए यह उपयुक्त अवसर है। इसलिए उन्होंने सक्षम तकनीकी अधिकारियों के माध्यम से बंधारे का प्रत्यक्ष निरीक्षण कराने और बंद किए गए सभी सात जलप्रवाह मार्गों की तकनीकी जांच करने की मांग की है। किसानों के प्रतिनिधियों ने आग्रह किया है कि पानी की उचित निकासी के लिए जरूरी सुधार किए जाएं और इसके बाद ही मरम्मत का काम दोबारा आगे बढ़ाया जाए।
इसके साथ ही किसानों ने बंधारे की जल भंडारण क्षमता, पानी के प्रवाह, निकासी के रास्तों और आसपास के क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने की मांग की है। उन्होंने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक उपाययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया है। किसानों की यह भी मांग है कि अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट, प्रस्तावित उपाययोजनाओं और आगे की कार्रवाई की जानकारी किसान प्रतिनिधियों को लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए।
इस संबंध में दिए गए ज्ञापन के दौरान अमित केशवराव पाटील, शिवाजी पाटील सर, प्रकाश सावंत, राजेंद्र पाटील, मदन पाटील, राजेंद्र दरेकर, बलिराम दरेकर, गौतम कांबले, बाजीराव चौगले, बलिराम पाटील, बाजीराव तापेकर और तुषार पाटील सहित कई किसान एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे। किसानों ने स्पष्ट किया है कि सातों जलप्रवाह मार्गों की तकनीकी जांच और पानी की निकासी के लिए जरूरी सुधार किए बिना मरम्मत का काम आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। अब इस मामले में सिंचाई विभाग की तकनीकी जांच और प्रस्तावित कार्रवाई पर किसानों की नजरें टिकी हैं।