स्वर्गीय सावित्री देवी के निधन के बाद झालरापाटन में परिजनों की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई।

झालरापाटन में मानवता और सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए स्वर्गीय सावित्री देवी के परिजनों ने उनके निधन के बाद नेत्रदान और देहदान का निर्णय लेकर दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी की उम्मीद जगाई। परिवार की सहमति से रात्रि 12:30 बजे नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई। वहीं, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में परिजनों की मौजूदगी में देहदान की प्रक्रिया भी पूरी की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, झालरापाटन निवासी सावित्री देवी के निधन के बाद उनके पति, जो नगर पालिका से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, बड़े बेटे दुष्यंत और छोटे बेटे बलवंत (फोटोग्राफर) ने आपसी सहमति से नेत्रदान का निर्णय लिया। परिवार की सहमति मिलने के बाद रात्रि 12:30 बजे नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इस निर्णय से दो दृष्टिहीन लोगों को दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी है।

नेत्रदान के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ कोटा से ज्योति रथ के माध्यम से झालरापाटन पहुंचे। उन्होंने सावित्री देवी के नेत्रों का संकलन किया।

उल्लेखनीय है कि लगभग तीन महीने पहले सावित्री देवी और उनके पति ने मेडिकल कॉलेज में मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया था। इसी संकल्प के तहत झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में आज परिवारजनों की मौजूदगी में देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। इससे पहले परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लेकर भी समाजसेवा की मिसाल प्रस्तुत की।

इस पुनीत कार्य में मंजुश्री स्नेह संस्थान के संस्थापक अजय मोमिया का विशेष सहयोग रहा।

सावित्री देवी के परिवार का यह निर्णय समाज को संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है। नेत्रदान और देहदान के माध्यम से परिवार ने मानवता की सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया और समाज में इन कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

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